देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को आईआरडीटी सभागार में आयोजित हिमालय दिवस समारोह में राज्यवासियों को हिमालय दिवस की शुभकामनाएं दीं और हिमालय संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हिमालय केवल बर्फीली चोटियों और पर्वतमालाओं का समूह नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां देश के करोड़ों लोगों को जीवन देती हैं, और यहां पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियां आयुर्वेद की रीढ़ हैं। उन्होंने चेताया कि वर्तमान में हिमालय गंभीर खतरों का सामना कर रहा है—जैसे जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन। इसके चलते ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वर्षा की तीव्रता बढ़ रही है और क्लाउड बर्स्ट, भूस्खलन जैसी आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं।
जलवायु सम्मेलन और संरक्षण योजनाएं
सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार ने वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के समन्वय से इन आपदाओं से निपटने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। नवंबर 2025 में उत्तराखंड में ‘विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हिमालय की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान और जनभागीदारी कार्यक्रमों के जरिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
प्लास्टिक और कार्बन उत्सर्जन पर कार्य
सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार ने “डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम” की शुरुआत की है, जिससे प्लास्टिक वेस्ट के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ 72 टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सफलता मिली है।
पर्यटन को बनाना होगा टिकाऊ
उन्होंने कहा कि अनियंत्रित और असंवेदनशील पर्यटन हिमालय के लिए खतरा बन रहा है। इसलिए सरकार “सस्टेनेबल टूरिज्म” को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन का विकास किया जा सके।
पारंपरिक ज्ञान को मिलेगा स्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की परंपराएं, ज्ञान और जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाना सिखाते हैं। उनकी भागीदारी और अनुभवों को नीतिगत फैसलों में शामिल किया जाएगा।
हिमालय जनजागरूकता सप्ताह
राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हर साल 2 से 9 सितंबर तक “हिमालय जनजागरूकता सप्ताह” मनाया जाएगा, जिससे जनसामान्य में संरक्षण के प्रति चेतना फैलाई जा सके।
पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी की चेतावनी
इस अवसर पर पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि इस वर्ष पूरे हिमालयी क्षेत्र में आपदाएं आई हैं, जिससे मानसून काल अब भयावह लगने लगा है। उन्होंने कहा कि हमें हिमालय को बचाने के लिए नई सोच और सामूहिक प्रयास करने होंगे।
कार्यक्रम में विधायक किशोर उपाध्याय, मेयर सौरभ थपलियाल, दर्जाधारी मधु भट्ट, यूकॉस्ट महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत और सूर्यकांत धस्माना सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

