Saturday, March 7, 2026
Homeराज्यउत्तराखण्डफर्जीवाड़ा रोकने के लिए साइबर थाने में टीम गठित, बुकिंग करते समय...

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए साइबर थाने में टीम गठित, बुकिंग करते समय रखें ये सावधानी

हेलिकॉप्टर से केदारनाथ जाने का मन बना रहे हैं तो इंटरनेट पर बिछे साइबर ठगों के जाल से बचना होगा। जरा सी चूक आपको ठगी का शिकार बना सकती है। फर्जीवाड़े पर अंकुश के लिए इस बार पहले से साइबर थाने में चार लोगों की टीम गठित कर दी गई है। टीम का पर्यवेक्षण सीओ साइबर अंकुश मिश्रा करेंगे।

बता दें कि आज से हेली सेवा की बुकिंग शुरू हो रही है। हर साल हेली सेवाओं के नाम पर देशभर के लोगों से ठगी की जाती है। ठग केदारनाथ हेली सेवा बुक करने के नाम पर लोगों से प्रति व्यक्ति हजारों रुपये लेकर उन्हें फर्जी टिकट तक भेज देते हैं।

वर्ष 2023 में इस तरह की ठगी से संबंधित 40 से ज्यादा मुकदमे प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज किए गए थे। ठगी का शिकार होने वालों में अधिकतर लोग उत्तराखंड के बाहर के ही थे। असल वेबसाइट से मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों को भ्रम में डालकर ठगी का शिकार बनाया जाता है। ऐसे में पिछले साल शुरुआत से ही साइबर पुलिस ने नई वेबसाइट पर शिकंजा कसना शुरू किया था।

45 फेसबुक पेज भी कराए गए थे बंद
जून 2024 तक ही 82 वेबसाइट को बंद कराया जा चुका था। इसके अलावा 45 फेसबुक पेज भी बंद कराए गए थे। इन पर भी हेली सेवाओं को बुक करने संबंधी विज्ञापन दिखाए गए थे। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि इस साल शुरुआत में ही साइबर थाने में चार अधिकारियों की एक टीम गठित कर दी गई है। यह टीम हर वक्त इंटरनेट पर फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर विज्ञापन वाले पेज व पोस्ट आदि की निगरानी करेगी। ताकि, समय रहते इन सभी वेबसाइट और पेज को बंद कराया जा सके।

टीम के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सीओ साइबर अंकुश मिश्रा को दी गई है। सोशल मीडिया पर विशेषतौर पर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि, शुरुआती दौर में ही लोगों को इस संबंध में जागरूक किया जा सके। ज्यादा से ज्यादा फर्जी वेबसाइट को बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पुलिस की ओर से भी जागरूकता के लिए कार्यक्रम ऑनलाइन चलाए जाएंगे।

सिर्फ आईआरसीटीसी की वेबसाइट से होते हैं टिकट बुक

बता दें कि पिछले साल से सरकार ने आईआरसीटीसी को टिकट बुकिंग का काम सौंपा था। ऐसे में केवल इसी वेबसाइट www.heliyatra.irctc.co.in से टिकट बुक किए जा रहे थे। इस वर्ष भी यह जिम्मेदारी आईआरसीटीसी के पास ही रहेगी। इस वेबसाइट पर कोई मोबाइल नंबर नहीं दिया गया है। जबकि, फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया विज्ञापनों में मोबाइल नंबर दर्ज होता है। ताकि, लोग इस पर फोन करें और ठग उन्हें अपनी बातों में फंसा लें।

ऐसे दिया जाता है लोगों को धोखा

– हेली कंपनियों के लोगो और नाम का करते हैं इस्तेमाल।

– साइबर ठग ऐसी वेबसाइट बनाते हैं, जो एकदम अधिकारिक लगती है।

– इन वेबसाइट पर कांटेक्ट अस नाम के कॉलम में मोबाइल नंबर दर्ज होता है। जबकि, असल वेबसाइट में कोई मोबाइल नंबर नहीं है।

– फर्जी वेबसाइट पर भले ही आपने भुगतान कर दिया, लेकिन इसकी जानकारी आपको हेली सेवा प्रदाता कंपनियों से नहीं मिलेगी।

लुभावने वादे

– फर्जी वेबसाइट पर लोगों से लुभावने वादे किए जाते हैं। मसलन टिकटों के प्राइस में छूट, एक के साथ एक फ्री आदि। इसके साथ ही कई और वादे।

– असल वेबसाइट पर एक निर्धारित पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल होता है, जबकि नकली वेबसाइट पर ठग अपने पर्सनल खातों में पैसा जमा कराते हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
video
play-sharp-fill

Most Popular

Recent Comments