देहरादून। उत्तराखंड को वीरों की भूमि यूं ही नहीं कहा जाता। इस पावन धरती का सैन्य इतिहास असंख्य शौर्य और पराक्रम की कहानियों से भरा पड़ा है। कारगिल युद्ध (1999) में भी उत्तराखंड के 75 जांबाजों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, जिनकी वीरता को याद किए बिना यह विजय गाथा अधूरी है।
देवभूमि के सपूतों का अमिट बलिदान
देश की रक्षा और सम्मान के लिए उत्तराखंड के जवान हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहे हैं। यही कारण है कि आईएमए से पासआउट हर 12वां अधिकारी उत्तराखंड से होता है और हर पांचवां सैनिक इसी वीरभूमि का बेटा होता है। आजादी के बाद से अब तक हुए विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों में उत्तराखंड के 1832 जवान शहीद हो चुके हैं।
कारगिल में गूंजा था उत्तराखंड का शौर्य
कारगिल युद्ध के दौरान गढ़वाल राइफल्स के 47 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, जिनमें 41 उत्तराखंड मूल के थे। कुमाऊं रेजीमेंट के 16 जवानों ने भी जान की बाजी लगाकर दुश्मन को पीछे धकेला। द्रास, बटालिक, मशकोह जैसी दुर्गम घाटियों में उत्तराखंड के रणबांकुरों ने दुश्मन को न सिर्फ रोका, बल्कि भारतीय तिरंगा लहराने में अहम भूमिका निभाई।
वीरता को मिले पदक, लेकिन मूल्यांकन शब्दों से परे
कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के वीर सैनिकों को 39 वीरता पदक से नवाजा गया, जिनमें शामिल हैं:
महावीर चक्र: 02
वीर चक्र: 10
शौर्य चक्र: 01
सेना मेडल: 16
युद्ध सेवा मेडल: 01
मेंशन-इन-डिस्पैच: 09
इन सम्मान चिह्नों से ज्यादा बड़ी बात यह है कि इन रणबांकुरों ने देश के लिए अदम्य साहस और अटूट संकल्प का परिचय दिया।
जब पहाड़ रो पड़ा था अपने लालों के लिए
कारगिल युद्ध के दौरान जब गढ़वाल रेजीमेंटल सेंटर लैंसडाउन में हेलीकॉप्टर से एक साथ नौ शहीद जवानों के पार्थिव शरीर उतारे गए, तब पूरा पहाड़ शोक में डूब गया था। हर गांव, हर घर मातम और गर्व के बीच झूलता नजर आया।
जिलावार बलिदान का विवरण
| जिला | बलिदानी सैनिक |
|---|---|
| देहरादून | 25 |
| पौड़ी | 13 |
| टिहरी | 12 |
| नैनीताल | 6 |
| चमोली | 5 |
| पिथौरागढ़ | 4 |
| अल्मोड़ा | 3 |
| रुद्रप्रयाग | 3 |
| बागेश्वर | 2 |
| ऊधमसिंह नगर | 2 |
हर वर्ष 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि उन वीरों को नमन किया जा सके जिन्होंने देश की आन-बान-शान के लिए अधम्य साहस और बलिदान का परिचय दिया। उत्तराखंड के इन सपूतों ने जो मिसाल पेश की, वह आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

