Saturday, March 7, 2026
Homeअपराधअटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना घोटाला; कहीं फंसी की सर्जरी दिखाई तो कहीं...

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना घोटाला; कहीं फंसी की सर्जरी दिखाई तो कहीं बिना आॅपरेशन ही लिया क्लेम


देहरादून। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत निजी अस्पताल जालसाजी की पराकाष्ठा तक जाकर सरकार को चूना लगा रहे हैं। कहीं एक जरा सी फुंसी की बड़ी सर्जरी दर्शाकर क्लेम हड़पा जा रहा है तो कहीं मरीज का ऑपरेशन किए बगैर ही अस्पताल लाखों रुपये डकारने में लगे हैं। योजना के नियमित ऑडिट में ऐसे मामले पकड़ में आ रहे हैं। इस तरह के घोटालों में अब तक लगभग 10 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। जबकि कई के खिलाफ कार्रवाई चल रही है।

पिछले दिनों एक मरीज का दून अस्पताल में गैंगरीन से ग्रसित होने के चलते पैर काट दिया गया था। इसके बाद वह मरीज इलाज के लिए दून स्थित विनोद ऑर्थो क्लीनिक में चला गया। वहां वह 17 दिन भर्ती रहा। विनोद ऑर्थो क्लीनिक ने इस बात का फायदा उठाया और मरीज के पैर के ऑपरेशन का भी क्लेम ले लिया। इस मामले में दिल्ली और राज्य की संयुक्त टीम ने जांच की तो मामला सामने आया। इस अस्पताल का यह अकेला मामला नहीं था, जिसमें इस तरह से क्लेम की रकम हड़पी गई। अस्पताल ने कई तरह से सरकार को चूना लगाया। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दिलीप कोटिया ने बताया कि अस्पतालों के ये कारनामे लगातार पकड़ में आ रहे हैं। कुछ अस्पतालों के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जा सकती है। प्रदेश के लगभग चार अस्पतालों की जांच अभी जारी है।

1- फुंसी का ऑपरेशन कर ले लिया 45 हजार का क्लेम
हाथ में फुंसी होने पर एक मरीज दून स्थित अस्पताल में पहुंचा था। अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज का इलाज किया और पट्टी कर घर भेज दिया, लेकिन जांच में पता चला कि इस मरीज की फुंसी के इलाज में ही अस्पताल ने 45 हजार रुपये का क्लेम विभिन्न पैकेजों के तहत ले लिया। इलाज के दौरान कई जांच होनी दर्शाई गईं। जबकि टीम ने जांच में पाया था कि यह एक सामान्य फुंसी थी।

2 – कूल्हे का ऑपरेशन हुआ, दो दिन बाद बाइक चलाई
विनोद ऑर्थो क्लीनिक के डॉक्टरों का यह चमत्कार था या कुछ और कि एक मरीज कूल्हे के ऑपरेशन के दो दिन बाद ही मोटरसाइकिल पर फर्राटा भरने लगा। दरअसल, सात मई को एक मरीज कूल्हे में दर्द की शिकायत के चलते इमरजेंसी में भर्ती होना बताया गया था, जिसका ऑपरेशन किया गया। जांच टीम जब अस्पताल पहुंची तो पता चला कि मरीज अस्पताल में नहीं है और थोड़ी देर में पुनरू इलाज के लिए आने वाला है। कुछ देर बाद ही मरीज मोटरसाइकिल पर सवार होकर अस्पताल पहुंच गया। टीम ने इस इलाज को भी संदेहास्पद और फर्जी माना है।

3- एक्स-रे किसी और का मरीज कोई और
विनोद ऑर्थो क्लीनिक की ओर से ही एक मरीज के हाथ का ऑपरेशन कर उसमें प्लेट फिट करने संबंधी क्लेम के लिए आवेदन किया गया। जांच टीम ने मरीज के एक्स-रे की जांच की तो उसमें रॉड डाली जानी दिखाई दे रही थी। जबकि मरीज की रिपोर्ट में प्लेट फिट किए जाने का जिक्र था। ऐसे में प्राथमिक जांच में ही पता चल गया कि यह एक्स-रे किसी और का है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
video
play-sharp-fill

Most Popular

Recent Comments