Sunday, March 8, 2026
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3 लाख कर्मचारी और पेेंशनरों को जल्द मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा


देहरादून। अटल आयुष्मान योजना में प्रदेश के तीन लाख कर्मचारी, पेंशनर और उनके आश्रितों को जल्द कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कर्मचारियों की मांग पर सरकार इलाज कराने के लिए रेफर की शर्त को समाप्त कर सकती है। जिससे कर्मचारी और पेंशनर किसी भी पंजीकृत बड़े निजी अस्पतालों में सीधे इलाज करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें पहले सरकारी अस्पतालों में दाखिल नहीं होना पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। आगामी कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगने की पूरी संभावना है। प्रदेश सरकार ने अटल आयुष्मान योजना में 23 लाख परिवारों को पांच लाख तक मुफ्त इलाज कराने की सुविधा दी है। वहीं, यू-हेल्थ कार्ड योजना को बंद कर तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को भी आयुष्मान योजना में शामिल कर लिया गया।

इसमें फर्क सिर्फ इतना था कि आम लोगों के लिए पांच लाख और कर्मचारी, पेंशनरों के लिए असीमित खर्चे पर इलाज का प्रावधान है, लेकिन रेफर की शर्त जोड़ दी गई। जबकि कर्मचारी संगठनों की मांग थी कि जब कैशलेस इलाज के लिए प्रतिमाह अंशदान देना पड़ रहा तो रेफर की शर्त नहीं होनी चाहिए। पूर्व में यू-हेल्थ कार्ड योजना में भी रेफर की कोई शर्त नहीं थी। वहीं, योजना में कर्मचारियों और पेंशनरों को ओपीडी की सुविधा दी जाए या नहीं, इसका आगामी कैबिनेट बैठक में हो सकता है।

कर्मचारियों और पेंशनरों का पूरा डाटा तैयार
आयुष्मान योजना में कर्मचारियों और पेंशनरों को असीमित खर्चे पर कैशलेस इलाज की सुविधा देने की पूरी तैयारी हो गई है। सभी विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) के माध्यम से कर्मचारियों और पेंशनरों का डाटा एकत्रित किया गया है।

पदों की श्रेणी के अनुसार कार्मिकों का प्रस्तावित अशंदान

स्तर                                                अंशदान रुपये में
1 से 5 श्रेणी(चतुर्थ)                            100
श्रेणी -6 (तृतीय)                               200
7 से 11 श्रेणी(द्वितीय)                       300
12 से श्रेणी से ऊपर(अधिकारी)             400
सेवानिवृत्त कर्मचारी                            पद की श्रेणी के अनुसार

कर्मचारियों की मांग है कि केंद्रीय कर्मचारी स्वास्थ्य योजना की तर्ज पर इलाज की दरें तय की जाएं। इसके साथ ही रेफर करने की शर्त को समाप्त कर, ओपीडी और बीमारी से संबंधित जांच की सुविधा भी इसमें शामिल की जाए। यदि ये सुविधाएं नहीं मिलतीं तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
-अरुण पांडे, कार्यकारी महामंत्री, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
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