Saturday, March 7, 2026
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”स्थाई राजधानी” घोषित होने का इंताजर कर रही ”गैरसैंण” में उत्तराखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से, पक्ष-विपक्ष में कई मुद्दों पर होगी गरमा-गरम बहस

देहरादून (संवाददाता) : अब से थोड़ी देर बाद यानी मानक टाइम प्रात 11.00 बजे से चमोली जिले के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) – जिसे आप घोषणा के इंतज़ार वाली स्थाई राजधानी भी कह सकते हैं- में उत्तराखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र आरंभ होने जा रहा है। गैरसैंण के नाम पर चल रही सियासत के बीच कड़ाके की सर्दी में आयोजित इस सत्र के खासे गरमाने के आसार हैं। विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी को अपने तरकश में मुद्दों के तमाम तीर संजोए हैं तो सत्तापक्ष भी पूरी रणनीति के साथ सदन में उतरेगा।

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी (भाजपा के घोषणा पत्र के अनुसार, पर जनता का इंतज़ार स्थाई राजधानी वाला बना ही रहेगा) का दर्जा दिए जाने और विधानसभा में लंबित लोकायुक्त व तबादला विधेयक को लेकर सभी की नजरें इस सत्र पर टिकी हुई हैं। सत्र के पहले ही दिन सरकार सदन में अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी। उत्तराखंड की चौथी निर्वाचित विधानसभा का पहला शीतकालीन सत्र गैरसैंण के निकट भराड़ीसैंण में आज से शुरू हो रहा है। पिछली कांग्रेस सरकार की तर्ज पर ही मौजूदा भाजपा सरकार ने भी गैरसैंण में सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया, हालांकि दिसंबर के सर्द मौसम में गैरसैंण में इतने बड़े आयोजन को लेकर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं।

पिछले सत्र के दौरान सरकार के रुख से आहत कांग्रेस ने गुरुवार रात्रि गैरसैंण में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में हिस्सा लिया। विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह मौजूद थे।

कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में कांग्रेस की मौजूदगी के बावजूद यह तय है कि सदन के भीतर कांग्रेस की रणनीति बगैर कोई मौका गंवाए सरकार को घेरने की रहेगी।

कांग्रेस के तरकश के तीर

इस सत्र में विपक्ष कांग्रेस मुख्यतया निकायों के परिसीमन को लेकर सरकार के रुख, प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों पर जबरन ब्रिज कोर्स थोपने, महंगाई, स्वास्थ्य व कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरेगी। साथ ही प्रदेश में लोकायुक्त व तबादला कानून लागू न करने पर भी सरकार को निशाने पर लिया जाएगा।  विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षकों के आक्रोश को भी भुनाने की तैयारी की गई है। राज्य कर्मचारियों के आंदोलन के रूप में कार्मिक असंतोष को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी है।

सत्र में सवालों की भरमार भी रहेगी

शीकालीन सत्र में सवालों की भरमार रहेगी। विधानसभा सचिवालय को विधायकों के 1050 से ज्यादा सवाल मिल चुके हैं। इस बार सदन में सदस्यों की 159 याचिकाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी। लोकायुक्त विधेयक व तबादला विधेयक के अलावा, उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन एवं सेवा शर्तें) विधेयक, उत्तराखंड नगर निकाय अधिनियम 1959 (संशोधित अध्यादेश) समेत कुछ अन्य विधेयक सत्र में पेश किए जा सकते हैं।

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