Saturday, March 7, 2026
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आपदाओं ने थमा दी शिक्षा की रफ्तार: छुट्टियों में कटौती और नए शैक्षणिक मॉडल पर विचार

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं के चलते पिछले दो महीनों से उत्तरकाशी, चमोली, देहरादून, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों के कई क्षेत्रों में पठन-पाठन कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खासकर धराली, थराली, नंदानगर, रायपुर, डोईवाला और जखोली जैसे विकासखंडों में कई दिनों तक स्कूलों को बंद करना पड़ा।

इन क्षेत्रों में प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों में बार-बार अवकाश घोषित करना पड़ा, जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई। इस स्थिति से निपटने के लिए शिक्षा विभाग ने वैकल्पिक योजना तैयार की है। इसके तहत प्रभावित विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षाएं चलाई जाएंगी, अध्ययन समय बढ़ाया जाएगा और ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प भी अपनाया जाएगा ताकि समय पर पाठ्यक्रम पूरा किया जा सके।

शैक्षणिक सत्र पर पड़ रहा असर

शिक्षा विभाग के अनुसार, लगातार आपदाओं के कारण शैक्षणिक सत्र पर असर पड़ रहा है। अध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में कोई रुकावट न आने दें। हालांकि निजी स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई की भरपाई की कोशिश की है, लेकिन वहां भी पूरा पाठ्यक्रम पूरा कराना चुनौती बना हुआ है।

1409 विद्यालय क्षतिग्रस्त

अब तक राज्य में कुल 1409 विद्यालय आपदाओं के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इनमें से 1211 विद्यालय केवल आठ जिलों में क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पढ़ाई जारी है, लेकिन अधिकतर प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप है। खासकर सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा की औपचारिक व्यवस्था नहीं होने से समस्या और बढ़ गई है।

शिक्षा विभाग कर रहा छुट्टियों पर पुनर्विचार

राज्य के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार वर्ष में 240 कार्य दिवस होते हैं, जिनमें से रविवार, सार्वजनिक, ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन छुट्टियां मिलाकर लगभग 125 दिन अवकाश रहता है। लेकिन हाल के वर्षों में आपदाओं और मौसम अलर्ट के कारण अतिरिक्त छुट्टियों का बोझ बढ़ गया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग मानसून सीजन के लिए अलग से 10 दिन की छुट्टी तय करने पर विचार कर रहा है। इसकी पूर्ति के लिए गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में कटौती की जा सकती है।

यह योजना यदि लागू होती है, तो आपदाओं के चलते पढ़ाई में आ रही रुकावट को कम किया जा सकेगा और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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