अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का असर पूरे भारत पर चाहे कम हो, लेकिन बिहार पर इसका सबसे तीव्र प्रभाव पड़ा है। अगस्त 2025 की शुरुआत में लागू हुए 25% आयात शुल्क (टैरिफ) ने राज्य के प्रमुख निर्यात उत्पाद—मखाना, भागलपुरी सिल्क और हस्तशिल्प—को खासा नुकसान पहुंचाया है।
मखाना उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित
बिहार, जो देश के कुल मखाना उत्पादन का 80% और निर्यात का 25% हिस्सा देता है, इस टैरिफ नीति से सीधा प्रभावित हुआ है। हर साल लगभग 600 टन मखाना का निर्यात होता है, जिसमें से 25% अमेरिका को भेजा जाता है। अब यह व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है क्योंकि अमेरिकी बाजार में मखाना अब प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है।
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में केंद्र सरकार ने बिहार में मखाना बोर्ड का गठन कर इस उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया था। लेकिन ट्रंप प्रशासन की इस नई नीति से यह प्रयास बड़ा झटका झेल सकता है।
अन्य निर्यात उत्पाद भी प्रभावित
केवल मखाना ही नहीं, लीची, हल्दी, जर्दालु आम, भागलपुरी सिल्क, मधुबनी और मंजूषा पेंटिंग जैसे कृषि और कला आधारित उत्पादों पर भी असर देखने को मिल रहा है। अनुमान है कि करीब 250 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ बढ़ने के कारण अमेरिकी बाजार में ये उत्पाद 30% तक महंगे हो सकते हैं, जिससे मांग में भारी गिरावट संभावित है।
कला और हस्तशिल्प के लिए संकट
बिहार के मधुबनी और मंजूषा पेंटिंग जैसी कलाओं का अमेरिका में अच्छा खासा बाजार है। हर साल 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक की कला सामग्री अमेरिका निर्यात की जाती है। लेकिन उच्च टैरिफ के चलते अब ये कलाएं भी महंगी हो जाएंगी, जिससे कलाकारों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
निर्यातकों ने शुरू की नए बाजारों की तलाश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के निर्यातकों ने अब खाड़ी देश, यूरोप और एशिया जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है, और अगर रणनीति सही हो, तो नुकसान की भरपाई संभव है।
विशेषज्ञों की राय
“बिहार जैसे राज्य, जो कृषि और हस्तशिल्प पर निर्भर हैं, उनके लिए यह टैरिफ नीति नुकसानदेह है। हमें निर्यात विविधीकरण और वैकल्पिक बाजारों की नीति पर तुरंत काम करना होगा।”– कृषि एवं निर्यात विशेषज्ञ, डॉ. अजीत सिंह
“अमेरिका के टैरिफ से सबसे ज्यादा असर बिहार के किसानों, कलाकारों और सूक्ष्म उद्योगों पर पड़ेगा। यह सिर्फ आर्थिक नहीं, सामाजिक चुनौती भी है।” – शिल्प कला विशेषज्ञ, प्रवीण चौधरी

