नई दिल्ली: भारत ने चिप निर्माण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली स्वदेशी चिप ‘विक्रम-3201’ का निर्माण किया है। यह उपलब्धि भारत सरकार की “सेमीकॉन इंडिया” पहल के तहत हासिल की गई है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सेमीकॉन 2025’ विज़न का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री को उद्घाटन समारोह के दौरान यह चिप सौंपी गई। उन्होंने इस मौके पर कहा कि जिस प्रकार तेल और कोयला 20वीं सदी के विकास का आधार थे, उसी प्रकार चिप्स और सेमीकंडक्टर्स 21वीं सदी के विकास को परिभाषित करेंगे।
क्या है ‘विक्रम-3201’?
‘विक्रम-3201’ भारत में निर्मित 32-बिट का एक माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने डिज़ाइन और डेवलप किया है। इसके साथ ही इस परियोजना के तहत अन्य कई चिप्स पर भी काम किया गया है, जिनके पेटेंट भी फाइल किए जा चुके हैं।
यह चिप भारत में बनाए गए सबसे छोटे और उन्नत चिप्स में से एक है। इसका उपयोग स्मार्टकार्स, टीवी, स्मार्टफोन, डिजिटल उपकरणों और औद्योगिक मशीनों में किया जा सकेगा।
भारत में चिप निर्माण का नया युग
कुछ वर्षों पहले तक भारत को चिप निर्माण में केवल उपभोक्ता के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब भारत धीरे-धीरे एक वैश्विक चिप निर्यातक के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में अमेरिका, ताइवान, चीन, कोरिया, जापान और मलेशिया जैसे देश इस क्षेत्र में अग्रणी हैं। अब भारत भी उस सूची में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुका है।
सेमीकॉन 2025 का उद्देश्य भारत को एक पूर्ण सेमीकंडक्टर राष्ट्र बनाना है। इसके अंतर्गत देश में 48 से अधिक प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है।
आगे की योजना
सरकार का लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में भारत न केवल अपने लिए चिप्स बनाए, बल्कि उनका निर्यात भी करे। इसके लिए देश में कई फैब प्लांट्स, पैकेजिंग यूनिट्स और सेमीकंडक्टर डिजाइन संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं।

