Saturday, March 7, 2026
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बगावत वाली सीटों पर कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल की पूरी कहानी

उत्तराखंड कांग्रेस की दूसरी सूची जारी होने के बाद कई सीटों पर बगावत के सुर मुखर हो गए थे। कुमऊं मंडल में रामनगर, लालकुआं और कालाढूंगी पर दावेदारों और उनके समर्थकों का खासा रोष देखने के लिए मिला। जिसके बाद मामला हाई कमान तक पहुंचा तो कांग्रेस ने दूसरी सूची को होल्ड पर डाल दिया। हरीश रावत और यशपाल आर्य जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए। देर रात कुमाऊं की चार सीटों रामनगर, लालकुआं, कालाढूंगी पर प्रत्याशियों की नई सूची के साथ-साथ सल्ट सीट पर भी प्रत्याशी का नाम तय कर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लालकुआं से टिकट देकर कांग्रेस ने लालकुआं और रामनगर विधानसभा में कार्यकर्ताओं की आपसी फूट को दूर करने के साथ ही एक तीर से कई शिकार किए हैं। दरअसल कांग्रेस ने अपनी दूसरी लिस्ट में रामनगर से हरीश रावत व लालकुआं से पूर्व ब्लाक प्रमुख संध्या डालाकोटी को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। जिसके बाद रामनगर व लालकुआं में बगावत के सुर फूटने लगे थे। रामनगर में जहां रंजीत रावत ने बगावत का बिगुल फूंक दिया वहीं लालकुआं में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल व वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरेंद्र बोरा ने महापंचायत कर टिकट वितरण को लेकर पुनर्विचार ना करने पर निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। दोनों सीटों को हाथ से निकलता देख कांग्रेस आलाकमान ने लालकुआं से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया है। जिसके बाद लालकुआं सीट में बगावत थम गई है। जबकि रणजीत रावत को सल्ट से प्रत्याशी बनाकर उनका भी सम्मान रखा गया।

कहा जा रहा है कि लालकुआं सीट पर हो रहे विद्रोह को टालने के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बुधवार को यशपाल आर्य ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरेंद्र बोरा से मुलाकात कर उनसे रायशुमारी की। साथ ही उनको हरीश रावत के पक्ष में समर्थन देने को कहा। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस द्वारा लालकुआं से घोषित की गई प्रत्याशी संध्या डालाकोटी से भी मुलाक़ात की। हरीश रावत के लालकुआं से टिकट मिलने के बाद कांग्रेस में फिलहाल गुटबाजी व बागवत थम गई है।

कांग्रेस ने कालाढूंगी सीट पर चेहरा बदल महेन्द्र पाल की जगह प्रदेश महासचिव महेश शर्मा को उम्मीदवार बना दिया है। साल 2012 और 2017 में पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर शर्मा ने निर्दल दम दिखाया था। विधानसभा में उनके जनाधार को देखते हुए उम्मीद थी कि लगातर तीसरी बार पार्टी उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं करेगी। मगर संगठन ने उनकी जगह पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल को टिकट थमा दिया। जिससे शर्मा के समर्थकों में मायूसी छा गई। दो दिन से उनके आवास पर समर्थकों का जमावड़ा लग था। आखिर में जमीनी पकड़ को ध्यान में रख पार्टी ने चेहरा बदल शर्मा को उम्मीदवार घोषित कर ही दिया।

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