Saturday, March 7, 2026
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पश्चिम बंगाल; अमर्त्य सेन के जय श्री राम नारे को भुनाने में जुटी तृणमूल, लगाए पोस्टर


कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लड़ाई अब पोस्टर वॉर में तब्दील हो गई है। ममता बनर्जी सरकार नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के जय श्री राम को लेकर दिए बयान को राज्य में भाजपा के खिलाफ भुनाने की मुहिम में जुट गई है। इसके लिए उसने बांग्ला भाषा में सेन के बयानों को पोस्टर में छपवाकर शहरों मे लगाए गए हैं।

हाल ही में सेन ने जय श्रीराम के नारे पर टिप्पणी की थी। कुछ दिनों पहले सेन ने कहा था कि जय श्रीराम बंगाली संस्कृति से जुड़ा नहीं है और राम नवमी इन दिनों काफी मशहूर हो रही है। जबकि उन्होंने पहले कभी इसके बारे में नहीं सुना था। अर्थशास्त्री ने कहा था, ‘मुझे लगता है कि जय श्रीराम के नारों का इस्तेमाल लोगों को पीटने के लिए किया जाता है।’

अमर्त्य सेन ने कहा, ‘जय श्रीराम हमारी आत्मा में हैं। यह हमारी आत्मा से आता है। यदि आप तमिलनाडु जाएंगे तो आपको राम चंदम दिखाई देंगे। यदि आप थोड़ा आगे कर्नाटक में जाएंगे तो आपको राम लिंगम देखेंगे और फिर जब आप आंध्र प्रदेश जाएंगे तो आपको रामा राव दिखाई देंगे। हर जगह राम ही राम हैं।’

बंगाल के मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा, ‘शहर में नोबल पुरस्कार विजेता के पोस्टर्स को साधारण लोगों ने लगाया था। हम अमर्त्य सेन का समर्थन करते हैं। वह बंगाल के महान बेटे और शान हैं। उनसे असहमत होकर बीजेपी ने उनका अपमान किया है। जय श्रीराम के नारे लगाना जुर्म नहीं है बल्कि यह एक पवित्र मंत्र है। यह हमें अंदर से पवित्र करता है। लेकिन जब जय श्रीराम को लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए कहा जाता है तो इसकी पवित्रता में बाधा पहुंचती है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह बिलकुल उसी तरह है जब हम किसी मस्जिद या धार्मिक स्थल पर अल्लाहु अकबर कहते हैं तो इसकी शुद्धता बरकरार रहती है लेकिन जब कोई आतंकी या तालिबानी कश्मीर में निर्दोष लोगों को मारने के लिए इसे कहते हैं तो वह अल्लाहु अकबर की बेइज्जती करते हैं। मैं सीधे भाजपा पर आरोप नहीं लगा रहा हूं लेकिन उसके समर्थक सोशल मीडिया पर इसका दावा कर रहे हैं। वह जबरन लोगों से जय श्रीराम बुलवा रहे हैं।’

हाकिम के बयान पर भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा विधायक मनोज टिग्गा ने कहा, ‘अमर्त्य सेन ने अपना ज्यादातर समय बंगाल की बजाए अमेरिका में बिताया है। इसलिए उन्हें जय श्रीराम का महत्व नहीं पता। यदि हम बंगाल और भारत में जय श्रीराम के नारे नहीं लगाएंगे तो क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अमेरिका में कहेंगे?’

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