Saturday, March 7, 2026
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आम आदमी की कैंटीन पर संकट, राजधानी देहरादून में ही दम तोड़ रही योजना

आमजन को सस्ता और हाइजेनिक खाना उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई इंदिरा अम्मा भोजन योजना देहरादून शहर में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। नगर निगम क्षेत्र में इस योजना के तहत बने पांच इंदिरा अम्मा भोजनालय (कैंटीन) में से दून अस्पताल में बनी एक कैंटीन तो पूरी तरह बंद हो चुकी है। जबकि, सब्सिडी वाली चार अन्य कैंटीन चलाना भी संचालकों को मुश्किल हो रहा है।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में 20 रुपए में इंदिरा अम्मा थाली उपलब्ध कराने की योजना की शुरूआत हुई थी। इसके तहत देहरादून नगर निगम क्षेत्र में घंटाघर स्थित एमडीडीए कॉम्पलेक्स, सचिवालय, आईएसबीटी ट्रांसपोर्टनगर, विकास भवन सर्वे चौक और दून अस्पताल में इंदिरा अम्मा कैंटीन शुरू की गई थी। इन कैंटीन के संचालन का जिम्मा महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया गया था।

सचिवालय स्थित कैंटीन का संचालन बिना सब्सिडी के दिया गया था। जबकि बाकी कैंटीन में प्रति थाली के हिसाब से 20 रुपए ग्राहक को देना होता था और हर थाली पर सब्सिडी के रूप में 10 रुपए कैंटीन संचालक को राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं।

राज्य में भाजपा सरकार बनने के कुछ महीने बाद विभिन्न कैंटीन को टेंडर के जरिए दूसरे स्वयं सहायता समूहों को सौंप दिया गया। समय पर सब्सिडी वाला बजट न मिलने से कैंटीन संचालकों को कैंटीन चलाना मुश्किल हो रहा है। संचालकों का कहना है कि कोरोना काल के बाद और महंगाई बढ़ने से अब 20 रुपए में थाली उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। दून अस्पताल वाली कैंटीन तो कोरोना काल के पहले ही बंद हो गई थी, उसकी जगह अब स्टोर बना हुआ है।

इसी तरह, एमडीडीए कॉम्पलेक्स घंटाघर, विकास भवन और ट्रांसपोर्टनगर आईएसबीटी में भी ग्राहक कम मिल रहे हैं। विकास भवन स्थित कैंटीन चलाने वाली धरा संस्था की फरजाना ने कहा कि कोरोना के बाद ग्राहक भी कम आ रहे हैं। व्यवसायिक सिलिंडर, खानपान व दूसरी चीजों के दाम बढ़ने से अब 20 रुपए प्रति थाली के हिसाब से कैंटीन चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, सचिवालय स्थित कैंटीन की संचालक सर्वशक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की सीमा ने बताया कि शुरू से ही नॉन सब्सिडी के आधार पर कैंटीन चला रहे हैं। पहले 30 रुपए प्रति थाली थी अब महंगाई बढ़ने पर इसे 40 रुपए प्रति थाली कर दिया गया।

यह थी विशेषता

– 20 रुपए की थाली में चार रोटी, चावल, दाल, सब्जी, चटनी या अचार। इसमें दो रोटी मंडुवे की भी। खीर या अतिरिक्त रोटी-चावल लेने पर अतिरिक्त रुपए देने होते हैं।
– हफ्ते में एक दिन पूरी पहाड़ी थाली, जिसमें चटनी, मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर आदि शामिल रहते हैं।
– इंदिरा अम्मा कैंटीन के जरिए स्थानीय उत्पादों को मिल रहा था पहले अच्छा प्रचार और बाजार।
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