Saturday, March 7, 2026
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नंदा गौरा योजना के अंतर्गत जनपद से 57 आवेदन पत्र ऑनलाइन हुए प्राप्त

नंदा गौरा योजना के अंतर्गत प्रत्येक शिशु के जन्म पर 11 हजार की धनराशि उपलब्ध कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस खाती की अध्यक्षता में विकास भवन कार्यालय कक्ष में जिला स्तरीय चयन समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

मुख्य विकास अधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि नंदा गौरा योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना, बाल विवाह रोकना, समाज में लैंगिक असमानता को दूर करना, सामाजिक असमानता को दूर करना, कन्या शिशु को परिवार में सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना, संस्थागत प्रसवों को प्रोत्साहित करना, उन्हें उच्च शिक्षा हेतु प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए जनपद में जन्में सभी कन्या शिशु को इसका लाभ अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के अंतर्गत शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत प्रतिशत पालन करते हुए सभी अभिलेखों जिसमें जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, स्थाई निवास आदि का ठीक प्रकार से परीक्षण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने इस योजना के तहत विकासखंड वार प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि कोई भी कन्या शिशु इस योजना का लाभ लेने से वंचित न रहे। इसके लिए जिन आवेदकों द्वारा आवेदन नहीं किया जा सका है। इसके लिए योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए ऐसे लाभार्थियों से पुनः आवेदन प्राप्त करने के भी निर्देश दिए।

जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास अखिलेश मिश्र ने मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया है कि नंदा गौरा योजना के अंतर्गत जनपद में कुल 57 आवेदन ऑनलाइन प्राप्त हुए हैं। जिसमें विकासखंड अगस्त्यमुनि से 38 आवेदन-पत्र, जखोली से 10 तथा ऊखीमठ से 09 आवेदन पत्र ऑनलाइन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि गौरा कन्या धन योजना के अंतर्गत कन्या शिशु जन्म पर 11 हजार की धनराशि, बालिका के कक्षा 12वीं उत्तीर्ण कर स्नातक/डिप्लोमा में प्रवेश एवं अविवाहित होने पर 51 हजार की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना का लाभ एक परिवार की दो जीवित बालिकाओं को ही दिया जाएगा तथा इसकी मुख्य अर्हताएं कन्या शिशु माता-पिता उत्तराखंड राज्य के स्थाई निवासी होने चाहिए तथा परिवार की मासिक आय 6 हजार तक होनी चाहिए। जिसकी वैद्यता एक वर्ष ही मान्य होगी। कन्या शिशु का जन्म सरकारी अस्पताल/निजी अस्पताल/एएनएम सेंटर तथा ग्रामीण क्षेत्र जहां अस्पताल की सुविधा उपलब्ध नहीं है पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी द्वारा ही प्रमाण पत्र होना चाहिए। आवेदन पत्र के साथ माता-पिता का पेन कार्ड, आधार कार्ड की छायाप्रति संलग्न की जानी आवश्यक है। नजदीकी सीएससी सेंटर से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

बैठक में परियोजना निदेशक विमल कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विमल गुसाईं, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक अजय कुमार चौधरी, परियोजना अधिकारी बाल विकास अगस्त्यमुनि शैली प्रजापति, ऊखीमठ देवेश्वरी कुंवर, जखोली हिमांशु बडोला सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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