राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। गुरुवार सुबह साढ़े दस बजे तक 800 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि मौके पर लगभग 60-70 यात्री अभी भी रुके हुए हैं।
गौरीकुंड–सोनप्रयाग मार्ग पर सफल राहत अभियान
बुधवार को गौरीकुंड और सोनप्रयाग के बीच भारी भूस्खलन के कारण रास्ता बंद हो गया था, जिस कारण 2179 यात्री फंस गए थे। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की अलग-अलग टीमों ने जंगल के रास्ते कच्चा ट्रैक बनाकर यात्रियों को सुरक्षित सोनप्रयाग पहुंचाया।
एसडीआरएफ के एसआई आशीष डिमरी ने बताया कि शाम 7 बजे तक 1679 पुरुष, 414 महिलाएं और 47 बच्चों सहित सभी यात्रियों को सकुशल निकाला गया। ये सभी यात्री मंगलवार को बाबा केदारनाथ के दर्शन कर लौट रहे थे और मुनकटिया के पास फंस गए थे।
चारधाम मार्ग आंशिक रूप से खुला
राज्य के आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग ज्यादातर हिस्सों में खुला हुआ है। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मलबा जमा है, लेकिन यह मार्ग रोजाना अस्थायी रूप से खोला जा रहा है। सिरोबगड़ में भी सड़क बंद रहती है, लेकिन उसे दोबारा खोलने और स्थायी मरम्मत का कार्य जारी है।
अन्य प्रभावित मार्ग
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गंगोत्री हाईवे पर गंगोत्री जाने वाला मार्ग फिलहाल बंद है।
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पिथौरागढ़ में भी एक मुख्य मार्ग बंद है।
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राज्य में 62 सड़कें, जिनमें एक राष्ट्रीय और दो राज्य मार्ग शामिल हैं, अब भी बंद हैं।
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लगभग 35 ग्रामीण और पीडब्ल्यूडी सड़कों को खोलने का कार्य चल रहा है।
आईएमडी की चेतावनी के बाद सतर्कता
राज्य सरकार द्वारा सभी जिलों को IMD (भारतीय मौसम विभाग) की चेतावनी के आधार पर लगातार अपडेट और सुरक्षा निर्देश भेजे जा रहे हैं। आपदा सचिव ने कहा कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रण में रखा गया है।
श्रद्धालु सुरक्षित, यात्रा जारी
आज सुबह 200 यात्री बाबा केदारनाथ के दर्शन कर सुरक्षित लौट चुके हैं। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग की सक्रियता से चारधाम यात्रा फिलहाल आंशिक रूप से सुचारु बनी हुई है।
यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि आपदा प्रबंधन में उत्तराखंड प्रशासन, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की तत्परता जनजीवन की रक्षा में निर्णायक साबित हो रही है।

