रुद्रप्रयाग – केदारनाथ यात्रा मार्ग पर गौरीकुंड हाईवे तीसरे दिन भी बाधित रहा। सोनप्रयाग से आगे मुनकटिया के पास भारी मलबा और बोल्डर गिरने के कारण मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध है। इसके चलते सोनप्रयाग से किसी भी यात्री को आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई है।
हाईवे बाधित होने के बावजूद केदारनाथ से लौट रहे यात्रियों को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने जंगल के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला। अब तक 1100 से अधिक यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से सोनप्रयाग लाया जा चुका है। बुधवार को मार्ग बाधित होने के बाद से अब तक 2179 से अधिक यात्रियों का रेस्क्यू किया गया है।
पचास से सत्तर मीटर तक क्षतिग्रस्त हुआ मार्ग
मुनकटिया के समीप भारी भूस्खलन से लगभग 70 मीटर सड़क का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। नेशनल हाईवे विभाग (एनएच लोनिवि) द्वारा पोकलैंड व जेसीबी मशीनों की मदद से बोल्डर व मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कार्य में भारी बाधा आ रही है।
एनएच लोनिवि के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडेय ने बताया कि सभी अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और हाईवे को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन पहाड़ से लगातार मलबा आने के कारण समय लग रहा है।
हजारों यात्री फंसे, इंतजार में
सोनप्रयाग व आसपास के क्षेत्रों में करीब 5000 से अधिक श्रद्धालु हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए सोनप्रयाग से आगे जाने की अनुमति फिलहाल नहीं दी है।
वैकल्पिक रास्ते से जारी है रेस्क्यू
गौरीकुंड से मुनकटिया की ऊपरी तरफ एक वैकल्पिक पगडंडी मार्ग एसडीआरएफ द्वारा तैयार किया गया है, जिससे जवान यात्रियों को सुरक्षित रास्ता पार करा रहे हैं। गुरुवार सुबह 10 बजे तक 800 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, जबकि 250 यात्रियों को शाम तक सोनप्रयाग पहुंचाया गया।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। जब तक मौसम अनुकूल नहीं होता और मलबा पूरी तरह नहीं हटता, तब तक यात्रा शुरू किए जाने की संभावना नहीं है।

