Saturday, March 7, 2026
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नए साल में मिलेगी रोप-वे की सौगात, कद्दूखाल से पांच मिनट में सुरकंडा देवी मंदिर पहुंचेंगे श्रद्धालु

सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी के भक्तों के लिए खुशखबरी है। मंदिर परिसर तक आसानी से पहुंचने के लिए पांच साल से निर्माणाधीन रोप-वे बनकर जल्द तैयार होने वाला है। मौसम ने साथ दिया तो दिसंबर के दूसरे सप्ताह में रोप-वे का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। उसके बाद चढ़ाई चढ़ने में असमर्थ देवी भक्त आसानी से मंदिर पहुंच कर देवी के दर्शन कर सकेंगे।

मां सुरकंडा देवी का मंदिर 2750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को अभी कद्दूखाल से डेढ़ किमी की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है, जिससे दिव्यांग और बुुजुर्ग श्रद्धालुओं को मंदिर पहुंचने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है, लेकिन रोप-वे तैयार हो जाने के बाद श्रद्धालु रोप-वे से 522 मीटर की दूरी महज पांच मिनट में तय कर मंदिर पहुंच सकेंगे। प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप में रोप-वे तैयार कर रही केआर आनंद इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी के प्रोजेक्ट इंचार्ज राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रो-वे का सिविल वर्क लगभग पूरा हो गया है।

सभी ट्रॉलियां और ट्रांसफार्मर भी लगा दिए गए हैं। गुजरात से मंगाया गया जेनरेटर दो-तीन दिन में पहुंचने वाला है। इन दिनों टिकट काउंटर का काम चल रहा है। बारिश और बर्फबारी नहीं हुई तो दिसंबर माह के द्वितीय सप्ताह में रोप-वे का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा और नए साल से देवी भक्त रोपवे से पांच मिनट में मंदिर पहुंच सकेंगे। जिला पर्यटन अधिकारी एसएस यादव ने कहा कि सभी कार्य लगभग पूरा हो गया है।

कद्दूखाल से पांच मिनट में पहुंच सकेंगे मंदिर    
सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी के दर्शन के लिए यूं तो हर माह श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्रि और गंगा दशहरा आदि पर्वों पर बड़ी संख्या में लोग देवी के दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए बुजुर्ग, दिव्यांग और छोटे बच्चों वाले परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जिससे कुछ लोग घोड़े-खच्चर पर बैठकर देवी के दर्शन करने जाते थे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग ने शासन में पीपीपी से रोप-वे बनाने का प्रस्ताव रखा। सरकार ने अपने 25 प्रतिशत शेयर के साथ इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देकर 25 अक्तूबर 2016 को रोप-वे का शिलान्यास किया था। रोप-वे को चार साल में तैयार किया जाना था। लेकिन कोरोना के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। कोरोना का कहर कम होने के बाद अब तेजी से काम किया जा रहा है।

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