Sunday, March 8, 2026
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एक युवक बना लोगो के लिए बरदान

आपने बहुत क्रांतियां देखी व सुनी होंगी लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसी क्रांति जो कि लोगो के लिए बरदान साबित हो रही है। पिछले करीब एक दशक से एक युवक मानव सेवा को देते हुए गौ मूत्र क्रांति अभियान चला लोगो के लिए एक भगवान का रूप स्थापित हुए हैं। गौ मूत्र से ये ऐसी बीमारियों का इलाज़ करते हैं जिसका इलाज़ दुनियां में कोई नही करता हो। लभी तक मुर्दे के रूप में आये सैकड़ो लोगो को जीवनदान दे दिया है।

 

आपको बता दें कि लाइलाज़ बिमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए मसीहा बने हुए हैं। कैंसर ,ब्लड कैंसर ,कोरोना ,एचआईवी जैसे गंभीर रोगियों को गऊ मूत्र और जड़ी बूटियों के मिश्रण से बनने वाली ‘चमत्कारी दवा’ से नया जीवन दे चुके है। कई मरीजों को तो मौत के मुंह से न सिर्फ बचाया बल्कि उन्हें सामान्य जीवन जीने लायक बनाकर उम्मीद की नई किरण जगाई हैं। एक छोटे से गांव पवलगढ़ में पिछले करीब दस वर्ष से गऊ मूत्र क्रांति नाम से अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के जरिये  प्राचीन चिकित्सा पद्यति को पुनर्जीवित करने के साथ ही आयुर्वेद को एक नया आयाम दिया है। उनके देशी फार्मूले ने अब तक कैंसर गठिया, शुगर, मिर्गी, थाईराईड, मोटापा, मस्तिष्क रोग, हैपेटाईटिस बी और सी सहित कई तरह के असाध्य रोगों से जूझ रहे लोगों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है। चमत्कारी दवा से सैकड़ो लोगों को नया जीवन मिला है। इन्हीं सेवाओं को देखते हुए विगत दिवस संत समाज ने पहुंचकर वैद्य प्रदीप भंडारी को उनके महान कार्य के लिए सम्मानित किया।  उनकी भक्ति और साधना के चलते ही उन्हें गौमूत्र और गौ माता पर सिद्धि हासिल हुयी है। उसकी बदौलत ही वह आज गंभीर रोगियों से जूझ रहे लोगों को नया जीवन दे रहे हैं।

 

इनकी माने तब जो इन्होंने गौ मूत्र क्रांति चलाई हुई है इससे पहले यहां आकर इनके जीवन मे क्रांति आई है। इन्होंने ऐसा कोई डॉक्टर नही छोड़ा जिससे इलाज़ न करे लिया हो। जब ये यहां आए तब इन्हें दूसरे के सहारे पकड़ कर लाया गया था लेकिन अब वह एक दम स्वास्थ्य हैं।

 

इनकी माने तब ये आगरा से आये हैं इन्हें डॉक्टरो ने बोर्न्स में ट्यूमर बताया था जब ये यहां आए तब इन्हें पकड़ पकड़ कर लाया गया था। लगभग एक माह की दवाई के बाद ये 50 प्रतिशत ठीक हैं।

वैध प्रदीप भंडारी

इनकी मने तब मानव सेवा ही भगवान की सेवा है । उनके यहां ऐसे ऐसे मरीज आये जिनकी जीवन की आस उनके परिजनों ने भी छोड़ दी थी और अंतिम सांस की तैयारी में जुट गए थे लेकिन आज इन क्रांति का हिस्सा बन कर वह जीवित हैं और अब सामान्य जीवन जी रहें हैं।

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