Sunday, March 8, 2026
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दून विवि विदेशों से फैकल्टी के लौटने का कर रहा इंतजार

देहरादून। दून विश्वविद्यालय प्रदेश का विदेशी भाषा कोर्स का संचालन करने वाला एकमात्र सरकारी शिक्षण संस्थान है। यहां स्पैनिश, जर्मन, चाइनीज, जैपनीज व फ्रैंच आदि विदेशी भाषाओं के कोर्स उपलब्ध हैं। विदेशी भाषा में भविष्य देख रहे प्रदेशभर के युवा दून विवि पर ही निर्भर हैं। बहरहाल विवि में विदेशी भाषाओं के विभाग लंबे समय से अस्थायी फैकल्टी के भरोसे हैं। दूतावास के माध्यम से विदेशों से अस्थायी फैकल्टी की व्यवस्था की जा रही है।

कोरोना काल में कई देशों के दूतावास ने अपने देश के नागरिकों को स्वदेश लौटने के निर्देश दिए थे। इस वजह से दून विवि में विदेशों से आई अस्थायी फैकल्टी को भी अपने देश लौटना पड़ा। अब विवि सामान्य रूप से खुल गया है, लेकिन विदेशी फैकल्टी नहीं लौटी है। उनके न आने से ऑफलाइन कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं।

सिर्फ ऑनलाइन कक्षाएं ही चल रही हैं। विवि को फैकल्टी के लौटने का इंतजार है। कई छात्रों ने भी फैकल्टी की समस्या को लेकर शिकायत की है। हालांकि, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने भी स्थायी फैकल्टी न होने की समस्या को महसूस किया है। उन्होंने इसके समाधान की दिशा में प्रयास भी शुरू किए हैं।
 
विदेशी भाषा में भविष्य देख रहे युवा 
भाषाः स्थायी, कॉन्ट्रेक्ट, नेटिव (मूल निवासी), कुल
स्पैनिशः 2, 3, 1, 6
जर्मनः 1, 3, 0, 4
चाइनीजः 2, 4, 0, 6
जैपनीजः 2, 3, 0, 5
फ्रैंचः 0, 5, 1, 6

वैश्वीकरण के युग में विदेशी भाषा का खासा महत्व है। प्रदेश के युवा इसे बखूबी समझ भी रहे हैं। तभी तो हर साल दून विवि में अधिक संख्या में विदेशी भाषा प्रोग्राम में आवेदन पहुंच रहे हैं। प्रत्येक विदेशी भाषा में 25-25 सीटें ही निर्धारित हैं। सीमित को ही दाखिला मिल पाता है। बाकी को दूसरे राज्यों के संस्थानों का रुख करना पड़ता है। बता दें, दून विवि में विदेशी भाषा में बीए व एमए का इंटीग्रेटेड कोर्स (5 वर्ष) संचालित होता है। बीए पूरा होते ही छात्रों को बड़े ऑफर मिल जाते हैं। 

दून विवि में पांच विदेशी भाषाओं का कोर्स संचालित हो रहा है। यह विवि के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके अच्छे परिणाम भी मिल रहे हैं, लेकिन स्थायी फैकल्टी न होने के कारण कई तरह की समस्या भी सामने आती हैं। इन विभागों में स्थायी फैकल्टी की व्यवस्था करने का प्रयास रहेगा। कोशिश रहेगी कि विवि को देश के शीर्ष संस्थानों में स्थान दिलाया जा सके।
– प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति, दून विवि

 

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