Saturday, March 7, 2026
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क्रिसमस और नये साल की तैयारी पर कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर कोर्ट ने सरकार से माँगा जवाब 

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने क्वारंटाइन सेंटरों की बदहाली को लेकर दायर अलग अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार से सवाल किया कि वो नैनीताल, मंसूरी और देहरादून में क्रिसमस और 31 दिमसबर को होने वाली पार्टियों को रोकने के लिए क्या इंतजाम कर रही है ? सरकारी अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि देहरादून और मसूरी में तो रोक लगा दी गई है, इसपर जिला मोन्टेरिंग कमेटी ने न्यायालय को सुझाव दिया कि क्रिसमस और 31 दिसंबर को नैनीताल में शाम 8 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक रात्री कर्फ्यू लगाया जाए । कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में कोविड रोकथाम को लेकर सुनवाई हुई । राज्य सरकार की तरफ से कुम्भ मेले की तैयारियों को लेकर एक शपथपत्र पेश किया गया, जिसे न्यायालय ने अपने रिकॉर्ड में ले लिया है। राज्य सरकार ने कहा कि वो कुम्भ मेले को लेकर अगली सुनवाई से पहले एक नई एस.ओ.पी.जारी कर रही है, जिससे मेले के दौरान भीड़, भगदड़ और सामाजिक दूरी बनी रहे। हरिद्वार की जिला मोन्टेरिंग कमेटी ने न्यायालय को बताया कि कुम्भ मेले को लेकर हरिद्वार में जो पुल और फ्लाईओवर बन रहे हैं उनको देखकर ये नहीं लगता है कि ये कुम्भ मेले तक बनकर तैयार हो जाएंगे । सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार से पूछा कि नैनीताल, मंसूरी और देहरादून में क्रिसमस और 31 दिसंबर को होने वाली पार्टियों को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है ? सरकारी अधिवक्ता ने कहा की देहरादून और मंसूरी में जिलाधिकारी ने सभी होटलों, सार्वजनिक स्थानों, ढाबो में पार्टियां करने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी है और जो भी ऐसे आयोजन कराएगा उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। न्यायालय ने जब नैनीताल के बारे में पूछा तो सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि इसपर जिलाधिकारी निर्णय लेंगे। जिला मोन्टेरिंग कमेटी ने न्यायालय को सुझाव दिया कि क्रिसमस और 31 दिसंबर को नैनीताल में शाम 8 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक रात्रि कर्फ्यू लगाया जाए, जिसपर न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि कमेटी द्वारा दिये गए सुझाव पर अमल किया जाय।
मामले के अनुसार अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली, देहरादून निवासी सच्चिदानंद डबराल ने क्वारन्टीन सेंटरों और कोविड अस्पतालों की बदहाली और उत्तराखंड वापस लौट रहे प्रवासियों की मदद और उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर उच्च न्यायालय में अलग अलग जनहित याचिकायें दायर की थी।

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