Saturday, March 7, 2026
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बागेश्वर के भूपाल सिंह कीवी की खेती से हर साल कमा रहे हजारों, नौवजवान को दे रहे कीवी की खेती करने के टिप्स

  • भूपाल सिंह ने मैदानी क्षेत्रों में नौकरी के लिए इधर-उधर भटकने की बजाय मेहनत कर कुछ अपना करने की ठानी। इसी हौसले ने उन्हें अलग पहचान दी। अब नौवजवान उनसे कीवी की खेती करने के टिप्स ले रहे है।
  • इस बार हल्द्वानी में काफी मात्रा में कीवी की डिमांड बढ़ गई। प्रदेश के बाहर भी उनके फल की सप्लाई हो रही है। उन्होंने इस बार 50 कुंतल कीवी हल्द्वानी भेजा।

बागेश्वर : जिले के गरुण तहसील के मुझारचौरा गांव निवासी काश्तकार भूपाल सिंह ने गांव में ही कीवी का उत्पादन कर लोगों को स्वरोजगार की राह दिखाई है। भूपाल सिंह ने मैदानी क्षेत्रों में नौकरी के लिए इधर-उधर भटकने की बजाय मेहनत कर कुछ अपना करने की ठानी। इसी हौसले ने उन्हें अलग पहचान दी। अब नौवजवान उनसे कीवी की खेती करने के टिप्स ले रहे है।

शुरुआत में भूपल सिंह ने प्रयोग के तौर पर एक खेत में दो-चार कीवी के पौधे रोप दिए। उन्हें खाद-पानी दिया। आवश्यकता हुई तो पेड़ों की छंटाई भी की। दो वर्ष बीते तो भूपाल के खेत में न्यूजीलैंड के फल कीवी का अच्छा खासा उत्पादन हो गया। इसके बाद उन्होंने इसे अपनी आय का जरिया बनाने की सोची। इसे दस नाली के खेत में उगाया। आज भूपाल सिंह कीवी की खेती कर प्रतिवर्ष हजारों रुपए कमा रहे हैं। साथ ही अपने इस कार्य में स्थानीय युवाओं को रखकर खेती करने का गुरु मंत्र देते हैं।

हल्द्वानी भेजा 50 कुंतल कीवी

इस बार हल्द्वानी में काफी मात्रा में कीवी की डिमांड बढ़ गई। प्रदेश के बाहर भी उनके फल की सप्लाई हो रही है। भूपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बार 50 कुंतल कीवी हल्द्वानी भेजा। भूपाल सिंह कौसानी के होटलों में नियमित रुप से कीवी देते हैं। वे बताते हैं कि कौसानी में पर्यटन सीजन में कीवी की डिमांड बढ़ जाती है। लॉकडाउन के कारण इस बार दिक्कत हुई। यहां आने वाले देशी व विदेशी पर्यटक इसे काफी पसंद करते हैं।

बीपी को नियंत्रित रखता है कीवी

कीवी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को अतिरिक्त बढ़ावा प्रदान करता है। रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। मुख्य तौर पर यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में बहुत सहायता करता है। जो उच्च रक्तचाप स्त्रोत या दिल के दौरे के की बीमारी को खत्म करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में बहुत सहायता करता है।

कीवी से शरीर प्रतिरक्षा प्रणाली में वृद्धि

कीवी फल में पोषक तत्व और विटामिन सी से भरपूर होता है। विटामिन सी एक आवश्यक पोषक तत्व है। एक अध्ययन में यह भी पाया गया है,कि ठंड या फ्लू जैसी बीमारियों के विकास की संभावना को कीवी बड़े आराम से कम कर सकता है। यह बीमारिया विशेष रूप से 65 से कम उम्र के वयस्कों और छोटे बच्चों को होती है।

पाचन में सहायता करता है

कीवी में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन के लिए पहले से ही अच्छा होता है। इनमें एक्टिनिडिन नामक प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम पाया जाता है। जो प्रोटीन में मदद कर सकता है।
कैस्ट्रॉल नियंत्रित करने के लिए

कीवी के लगातार सेवन से बैड-कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में वृद्धि होती है और साथ ही दिल से जुड़ी हुई कहीं बीमारियों ख़त्म करने में मुख्य रूप से फायदेमंद होता है।

कीवी वजन घटाने के लिए फायदेमंद

कीवी वजन कम करने में भी एक सहायक फल है। क्योकि इसमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और उच्च फाइबर सामग्री होती है, जिसका अर्थ है, कि यह वसा को स्टोर करके शरीर को प्रतिक्रिया देने से रोकेगा। जिससे शरीर का मोटापा ख़त्म होता है।

कैंसर होने से रोकता है

कीवी विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है। कीवी हमें मुक्त कणों को नष्ट करके लाभ पहुंचाता है। जो हमारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और जो त्वचा कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह कोलन कैंसर को भी रोकता है। इस फल के मांस में घुलनशील फाइबर होते हैं, जो बृहदान्त्र कैंसर को कम करने वाले बृहदान्त्र में अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं।

कब्ज़ से राहत के लिए

कीवी के नियमित सेवन से कब्ज की समस्या में भी फायदा होता है। क्योकि इसमें फाइबर की मौजूदगी से पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है। इसके नियमित उपयोग से कब्ज जैसी समस्या हमेशा के लिए पीछा छोड़ देती है।

हड्डियों को मजबूत बनाता है

कीवी फल में विटामिन के और कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। वे हड्डियों की चोटों और ऑस्टियोपोरोसिस के खिलाफ लड़ाई को कम करने में भी मदद करते हैं।

डायबिटीज को नियंत्रित करना

कीवी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है। जो ब्लड शुगर लेवल को तुरंत बढ़ने से रोकता है। कीवी में इनोसिटोल भी होता है, जो एक एंजाइम है, जो रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। जिससे डायबिटीज होने का खतरा बहुत कम हो जाता है।

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