Saturday, March 7, 2026
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मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी: सीएम धामी ने शहीद आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि, राजधानी गैरसैंण को लेकर फिर उठी आवाज

मसूरी– आज मसूरी गोलीकांड को 31 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन 2 सितंबर 1994 की वह दिल दहला देने वाली घटना आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी पहुंचकर मालरोड स्थित शहीद स्थल पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मसूरी के छह बलिदानी आंदोलनकारियों को याद किया गया, जिनकी शहादत उत्तराखंड राज्य निर्माण की नींव बनी।

2 सितंबर 1994: एक काला दिन

इस दिन मसूरी में शांतिपूर्ण तरीके से राज्य आंदोलनकारी प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोलियों की बौछार कर दी। इस बर्बरता में राय सिंह बंगारी, मदन मोहन ममगाईं, हंसा धनाई, बेलमती चौहान, बलबीर नेगी और धनपत सिंह शहीद हो गए थे। गोलीकांड में सीओ उमाकांत त्रिपाठी भी मारे गए थे।

शहीद बलबीर नेगी के छोटे भाई बिजेंद्र नेगी ने बताया कि उनके भाई को एक गोली सीने में और दो गोलियां पेट में मारी गई थीं। उन्होंने कहा, “इतनी बेरहमी से निहत्थे आंदोलनकारियों पर हमला किया गया, जिसे हम कभी भूल नहीं सकते।”

एक दिन पहले खटीमा में हुई थी फायरिंग

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी जय प्रकाश उत्तराखंडी ने बताया कि 1 सितंबर की शाम खटीमा से खबर आई थी कि वहां पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग की है। इसके विरोध में 2 सितंबर को मसूरी बंद किया गया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ। मगर रात को झूलाघर स्थित उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के कार्यालय पर पुलिस और पीएसी ने कब्जा कर लिया और उसे छावनी में तब्दील कर दिया। समिति के अध्यक्ष हुक्म सिंह पंवार सहित 46 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

इसके बाद मसूरी में जो कुछ हुआ, उसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया। बर्बर गोलीकांड में मासूम जानें चली गईं, और यहीं से उत्तराखंड राज्य आंदोलन और भी तेज हो गया।

“राज्य तो मिला, राजधानी अब भी अधूरी”

जय प्रकाश उत्तराखंडी ने कहा, “लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद उत्तराखंड तो बना, लेकिन आज भी राजधानी गैरसैंण को लेकर सरकारें गंभीर नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल-जंगल-जमीन के मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जाएं।

मुख्यमंत्री ने जताई संवेदना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। राज्य सरकार शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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