उत्तरकाशी: धराली क्षेत्र में पांच अगस्त को आई विनाशकारी आपदा को भले ही 18 दिन बीत चुके हों, लेकिन इसका असर अभी भी ग्रामीणों के मनोबल पर साफ देखा जा सकता है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, धराली में स्कूल खुलने के बाद भी बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अभिभावक अभी भी भय के माहौल में जी रहे हैं और बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
विद्यालय में नामांकित कुल 17 छात्र-छात्राओं में से केवल दो स्थानीय हैं, जबकि बाकी 15 बच्चे नेपाली मूल के हैं। शिक्षक सुशील नौटियाल ने बताया कि अधिकांश नेपाली मूल के छात्र अपने परिवार के साथ सेब के बगीचों में बनी छानियों में रहते हैं और उन्हें स्कूल तक पहुंचने के लिए एक से दो किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। अभिभावकों का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, वे अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे।
धराली आपदा में सबसे अधिक प्रभावित हुए नेपाली मूल के लोग
धराली आपदा में सबसे अधिक जान-माल का नुकसान नेपाली मूल के लोगों को हुआ था। इस त्रासदी की भयावह तस्वीरें अब भी स्थानीय लोगों और विशेषकर नेपाली मूल के परिवारों के ज़हन में ताजा हैं। इसी कारण उनके मन में डर और चिंता बनी हुई है। बच्चे भी मानसिक रूप से डरे हुए हैं और पढ़ाई की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
स्कूल में तैनात कर्मचारियों को भी हुआ नुकसान
धराली आपदा के समय राहत-बचाव दलों ने विद्यालय भवन को अस्थायी कैंप के रूप में उपयोग किया था, जिससे विद्यालय का ढांचा प्रभावित हुआ। वहीं, विद्यालय में तैनात एक शिक्षिका और भोजनमाता के आवास भी आपदा में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। फिलहाल शिक्षक प्रतिदिन स्कूल पहुंचते हैं, उपस्थिति दर्ज करते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं, क्योंकि विद्यार्थियों का आना बंद है।
प्रशासन से अपेक्षा
स्थानीय लोग और शिक्षक चाहते हैं कि प्रशासन गांव में भरोसे का माहौल बनाए और अभिभावकों को आश्वस्त करे ताकि बच्चे फिर से नियमित रूप से विद्यालय आ सकें। वर्तमान में आवश्यकता है कि बच्चों की मानसिक स्थिति को समझते हुए परामर्श सत्र (काउंसलिंग) आयोजित किए जाएं और विद्यालय को फिर से सुरक्षित वातावरण में संचालित किया जाए।

