उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई भीषण आपदा के छह दिन बाद राहत और बचाव कार्य तेज़ कर दिए गए हैं। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। खोजी कुत्तों और रेको डिटेक्टर मशीनों की मदद से सर्च अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 43 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है, जबकि 50 लापता लोगों की सूची तैयार की गई है। इनमें कई लोग बिहार और उत्तर प्रदेश के भी हैं, जो यहां काम की तलाश में आए थे।
आपदा के चलते क्षेत्र में सड़कें बंद हो गई हैं, जिस कारण ग्रामीणों तक राशन सामग्री घोड़े-खच्चरों के माध्यम से पहुंचाई जा रही है। वहीं, समेश्वर देवता मंदिर में आपदा प्रभावितों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं धराली क्षेत्र में शिविर स्थापित कर दो दिनों तक राहत कार्यों की निगरानी की। उन्होंने सभी प्रभावित परिवारों को फौरी राहत के रूप में सहायता राशि वितरण का आदेश दिया और मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सात दिनों के भीतर क्षेत्र में हुई क्षति का आकलन तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाए। साथ ही, ध्वस्त हुए कल्प केदार देवता मंदिर के पुनर्निर्माण की बात भी कही गई।
रविवार को मुख्यमंत्री आवास में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधियों ने धराली और हर्षिल क्षेत्र में राहत कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹1 करोड़ की धनराशि का योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने इस सहयोग के लिए बैंक प्रबंधन का आभार जताया।
गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए राजस्व परिषद के सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति सोमवार को उत्तरकाशी पहुंचेगी। यह टीम क्षेत्र में जाकर नुकसान का आकलन करेगी और प्रभावित लोगों से संवाद कर राहत पैकेज तैयार करेगी।
धराली आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और आजीविका की योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शासन ने सचिव राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई है, जो पहले से जोशीमठ के लिए तैयार राहत पैकेज का भी अध्ययन करेगी ताकि धराली के लिए प्रभावी राहत योजना तैयार की जा सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के सभी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सहायता वितरण कार्य शीघ्रता से पूर्ण किया जाए और किसी भी प्रकार की नकारात्मकता फैलाने से बचा जाए।
धराली की यह आपदा राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है, लेकिन सरकार और प्रशासन पूरी तत्परता से राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों को अंजाम देने में जुटे हैं।

