Sunday, March 8, 2026
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गबर सिंह बने गढ़वाल के दशरथ मांझी: दो किमी पहाड़ काटकर फुवाण गांव तक पहुंचाई सड़क

उत्तरकाशी। बिहार के दशरथ मांझी के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए गबर सिंह भी उत्तरकाशी के फुवाण गांव के लोगों के लिए फरिश्ता बन गए हैं। दशरथ मांझी ने अपने गांव गहलौर तक सड़क पहुंचाने के लिए पहाड़ को काट डाला था। गबर ने भी यही कर दिखाया है। उन्होंने डेढ़ महीने में जेसीबी से दो किलोमीटर पहाड़ को काटकर गांव तक सड़क पहुंचा दी है।
 
दो किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी
अभी तक लोगों को गांव तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। गांव में वाहन पहुंचा तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे। उन्होंने गबर सिंह को फूल-मालाओं से लाद दिया और कंधों पर उठा लिया। गांव में बाकायदा समारोह आयोजित कर गबर सिंह को सम्मानित किया गया।

राज्य गठन के बाद क्षेत्र को चार विधायक मिले हैं, लेकिन किसी ने भी फुवाण गांव के लोगों से किए वायदे को नहीं निभाया। चुनाव के दौरान हर दावेदार गांव के समक्ष यह वायदा जरूर करता है कि जीत गया तो अगली बार पैदल नहीं, बल्कि गाड़ी में आऊंगा। चुनाव निपट जाते हैं और नेता वादा भी भूल जाते हैं। जनप्रतिनिधियों के छलावे से परेशान गांव के युवा गबर सिंह रावत (38) ने गांव तक सड़क पहुंचाने का संकल्प लिया।
 
अकेले के दम पर दो किलोमीटर पहाड़ काटा
काम मुश्किल था, लेकिन गबर का हौसला ज्यादा मजबूत था। उन्होंने बगैर सरकारी सहायता के अकेले के दम पर दो किलोमीटर पहाड़ काट डाला। दो किमी सड़क को जेसीबी से काटने में करीब डेढ़ महीने का समय लग गया। गांव में वाहन पहुंचा तो लोग खुशी से झूम उठे। लोगों का कहना है कि जो सरकारी सिस्टम नहीं कर पाया वह गबर ने कर दिखाया। अब छोटे वाहन आसानी से गांव तक पहुंच सकते हैं। 

लंबे समय से परेशान थे लोग
विकासखंड के फुवाण गांव के 45 परिवार लंबे समय से गांव को सड़क से जोड़ने की मांग कर रहे थे। आज तक न तो शासन प्रशासन ने ग्रामीणों की बात सुनी और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने। किसी व्यक्ति के बीमार होने पर लोग उसे घोड़े खच्चर और चारपाई के सहारे सड़क तक पहुंचाते थे। इसी पीड़ा को दूर करने का संकल्प गबर ने लिया था। 

अगर गांव के एक युवक ने अपने प्रयासों से सड़क निर्माण किया है तो यह सराहनीय है। युवक का पता लगाकर उसका सम्मान किया जाएगा। अब तक सड़क क्यों नहीं बन पाई या इसका प्रस्ताव लंबित होने के संबंध में जानकारी नहीं है।
– मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी

 

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