उत्तरकाशी: यमुनोत्री धाम और आसपास के गांवों में बीते नौ दिनों से संचार सेवाएं ठप हैं, जिससे ग्रामीण और मजदूरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल नेटवर्क की तलाश में लोग पहाड़ियों पर चढ़कर सिग्नल ढूंढने को मजबूर हैं ताकि अपने परिजनों से संपर्क कर सकें।
वहीं दूसरी ओर, यमुनोत्री हाईवे पर सिलाई बैंड और जंगलचट्टी के पास सड़क मार्ग खोलने के प्रयास खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के मजदूर जान जोखिम में डालकर, कमर पर रस्सियां बांधकर चट्टानों को हटाने का कार्य कर रहे हैं। नीचे यमुना नदी और ऊपर से लगातार गिर रहे बोल्डरों के बीच हाईवे खोलना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
17 दिनों से जंगलचट्टी के पास हाईवे बंद होने के चलते स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हनुमान चट्टी के पास मार्ग अवरुद्ध होने के कारण 4 किलोमीटर लंबे वैकल्पिक पैदल रास्ते से 25 लीटर डीजल जैसी जरूरी वस्तुएं 1000 रुपये मजदूरी देकर नारद चट्टी तक पहुंचाई जा रही हैं ताकि पोकलेन मशीनें वहां तक आ सकें।
बनास गांव निवासी और नौगांव ब्लॉक प्रमुख सरोज पंवार ने बताया कि जिला प्रशासन और राजमार्ग निर्माण विभाग मार्ग खोलने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, लेकिन प्राकृतिक विपदाओं के कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं।
वहीं, हाईवे बंद होने का असर स्थानीय लोगों की आवाजाही और जेब पर भी पड़ा है। सामान्य दिनों में बड़कोट से जानकीचट्टी तक टैक्सी का किराया 150 रुपये होता है, लेकिन अब बाधित मार्गों और वैकल्पिक पैदल यात्रा के कारण लोगों को 100 से 250 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
कई जगहों पर सड़क बहाल, लेकिन खतरा बरकरार
भूस्खलन और भू-धंसाव के चलते यमुनोत्री हाईवे सिलाई बैंड, स्याना चट्टी, राना चट्टी, बाड़िया गांव, हनुमान चट्टी, जंगल चट्टी, नारद चट्टी और फूलचट्टी जैसे इलाकों में बुरी तरह प्रभावित है। हालांकि कई हिस्सों में सड़क खोल दी गई है, लेकिन चटख धूप के दौरान गिरते पत्थर और चट्टानी मलबा सरकारी मशीनरी के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। इसका सीधा असर चारधाम यात्रा पर भी पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
प्रशासन अलर्ट, रात के लिए ठहरने की व्यवस्था
एनएच विभाग के ईई मनोज रावत ने बताया कि हाईवे खोलने में कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। मशीन ऑपरेटरों के लिए बनास गांव में रात्रि विश्राम की व्यवस्था, और राना चट्टी में 20 से अधिक लोगों के ठहरने की सुविधा की गई है ताकि कार्य में देरी न हो। लेकिन बारिश और धूप के दौरान लगातार मलबा और पत्थर गिरने से कार्य में रुकावटें बनी हुई हैं।

