बागेश्वर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे को निराशाजनक बताते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने विभाजनकारी एजेंडे के लिए देवभूमि उत्तराखंड का इस्तेमाल न करे। साथ ही गृह मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक करने की चुनौती दी। रावत ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो जाते हैं तो वह राजनीति से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के तीन साल के कामकाज पर भाजपा को सार्वजनिक बहस की चुनौती भी दी।
स्थानीय लोनिवि गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरीश रावत ने प्रदेश में पलायन और गांवों की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 15 हजार बाखलियां खंडहर हो चुकी हैं और 200 गांव घोस्ट विलेज बन गए हैं। गांवों में भाजपा कार्यकर्ताओं से ज्यादा जंगली जानवर दिखाई देते हैं। इसके बावजूद पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा है। उन्होंने भाजपा सरकार से सवाल किया कि आखिर प्रदेश में विकास कहां हो रहा है।
खनन कारोबार में एकाधिकार स्थापित करने का आरोप
हरीश रावत ने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों ने ठेकेदारी और छोटे कारोबार के माध्यम से रोजगार हासिल करने वाले मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है। खड़िया, लीसा, रेता और बजरी के कारोबार में रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। उन्होंने खनन कारोबार में एकाधिकार स्थापित करने और काम किसी व्यक्ति विशेष को सौंपने की तैयारी की आशंका भी जताई। साथ ही भाजपा सरकार से भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब मांगा।
रेखा आर्य प्रकरण पर भाजपा से मांगा जवाब
रावत ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े 210 करोड़ रुपये की संपत्ति के मामले को उठाते हुए भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जवाब मांगा। उन्होंने रेखा आर्य और गणेश जोशी को सरकार में भ्रष्टाचार का मॉडल बताया। जैन प्रकरण और अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जैन प्रकरण व्यक्ति विशेष तक सीमित है, जबकि अंकिता प्रकरण उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा हुआ है।
खानपुर से चुनाव लड़ने की जताई इच्छा
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस ने 45 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने खानपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस आगामी चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी।
इसके अलावा उन्होंने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।
पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, हरीश ऐठानी, भगत डसीला, राजेंद्र टंगड़िया, बालकृष्ण और बसंत कुमार सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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