देहरादून। हिमालय, प्रकृति और पर्वतीय जनजीवन को अपनी रचनाओं में आत्मीयता से प्रस्तुत करने वाले प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड को पहला कार्बन जस्टिस अवार्ड प्रदान किया जाएगा। हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी और एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी इंडिया (एटीआई) ने इस पुरस्कार की शुरुआत की है।
ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने कहा कि रस्किन बॉन्ड ने अपनी कहानियों, उपन्यासों, कविताओं और बाल साहित्य के माध्यम से हिमालय के पहाड़ों, जंगलों, नदियों, घाटियों और यहां के जनजीवन को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी रचनाओं ने कई पीढ़ियों को प्रकृति और हिमालय के करीब लाने के साथ ही प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया है। उनके आजीवन साहित्यिक योगदान और हिमालय से गहरे जुड़ाव को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया है।
हिमालय के संरक्षण और जनकल्याण को मिलेगा बढ़ावा
कार्बन जस्टिस अवार्ड के माध्यम से शोध, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, तकनीक, सामुदायिक विकास, जन-जागरूकता, साहित्य और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों के प्रयासों को पहचान दी जाएगी।
डॉ. घनशाला ने कहा कि हिमालय का विकास केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं हो सकता। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों का कल्याण भी उतना ही आवश्यक है। हिमालय की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है।
हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण की दिशा में पहल
इस पुरस्कार की शुरुआत में एटीआई के पर्यावरण संरक्षण, उपयुक्त तकनीक और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ लंबे समय से किए जा रहे कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही ग्राफिक एरा के सेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज के चेयरमैन प्रो. एसपी सिंह का हिमालयी पारिस्थितिकी और संरक्षण के क्षेत्र में दीर्घकालिक शोध भी इस पहल की प्रेरणा बना है।
इस पहल के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण, सतत विकास और स्थानीय समुदायों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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