Thursday, October 1, 2026
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जापान के दो संत बने निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर, वीरभद्र मंदिर में हुआ पट्टाभिषेक

ऋषिकेश। जापान के संत स्वामी महादेवानंद गिरी और स्वामी कृष्णानंद गिरी को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया। वीरभद्र मंदिर में आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में दोनों संतों को तिलक-चादर प्रदान कर महामंडलेश्वर पद पर अभिषिक्त किया गया। दोनों संत महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी के शिष्य हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर और 13 अखाड़ों के संत-महापुरुष मौजूद रहे। संतों ने विधि-विधान के साथ दोनों नवनियुक्त महामंडलेश्वरों का पट्टाभिषेक किया।

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि महामंडलेश्वर केवल एक पद नहीं, बल्कि सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों संत जापान में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने भी दोनों संतों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अखाड़े और संत परंपरा का पालन करते हुए दोनों संत सनातन के उत्थान के लिए कार्य करें।

विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने भी नवनियुक्त महामंडलेश्वरों को बधाई दी। अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी और महंत दर्शन भारती ने कहा कि दुनिया के कई देशों में लोग सनातन संस्कृति से जुड़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वामी महादेवानंद गिरी और स्वामी कृष्णानंद गिरी जापान में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार को गति देंगे।

महामंडलेश्वर स्वामी बालाकुंभ पुरी ने दोनों शिष्यों को आशीर्वाद दिया। वहीं, नवनियुक्त महामंडलेश्वरों ने सभी संतों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे संत परंपराओं का पालन करेंगे और जापान में श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेंगे।

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