Saturday, March 7, 2026
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देहरादून में अपराधी आसानी से नहीं हो सकेगा फरार, नई तकनीकी से कसी जाएगी लगाम

देहरादून। तकनीक के इस दौर में आपराधिक घटनाओं के अनावरण के लिए पुलिस भी नई-नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। पहले अधिकतर घटनाओं का पर्दाफाश सर्विलांस से होता था तो अब सीसीटीवी कैमरों की भी भूमिका अहम हो गई है। सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल न सिर्फ आपराधिक घटनाओं के लिए बल्कि यातायात निगरानी के लिए भी किया जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पुलिस अब सीसीटीवी के सिस्टम को और मजबूत करने जा रही है।

शहर में लगे करीब 10 हजार सीसीटीवी कैमरों की गूगल मैपिंग की जा रही है। इसके बाद कोई अपराध होने पर अपराधी आसानी से बचकर बाहर नहीं भाग सकेगा। शहर के अंदर होने वाली आपराधिक घटनाओं के बाद बदमाश आसानी से बॉर्डर पार कर जाते हैं।

कैमरों की होगी गूगल मैपिंग
अपराध बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि अब तक जितने भी सरकारी व निजी कैमरे लगे हैं, उनकी मैपिंग नहीं हो पाई है। ऐसे में घटना होने के बाद पुलिस एक के बाद एक कैमरा खंगालती रहती है तब तक अपराधी शहर से बाहर फरार हो चुका होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एसएसपी अजय सिंह ने सभी कैमरों का गूगल मैपिंग करने के निर्देश जारी किए हैं।

मुख्य मार्गों पर लगे कैमरों की हो रही मैपिंग
सभी थाना क्षेत्रों में लगे पुलिस, स्मार्ट और निजी कैमरों की मैपिंग की जा रही है। इसके लिए पुलिस विभाग की ओर से सभी थानाध्यक्षों को एक एप उपलब्ध करवाई गई है, जिसके माध्यम से मुख्य सड़क पर लगे कैमरों की फोटो लेकर उनकी मैपिंग की जा रही है। एक बार शहर के सभी कैमरों की मैपिंग होने पर एक जगह बैठकर आसानी से किसी भी क्षेत्र का कैमरा देखा जा सकेगा।

अब तक यह है व्यवस्था
मौजूदा समय में कैमरों की मैपिंग न होने के चलते पुलिस को अपराधी तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। एक जगह अपराध होने के बाद पुलिस एक-एक कैमरे को चेक करते हुए आगे बढ़ती है। एक ही रूट पर यदि 500 कैमरे हैं तो सभी को खंगालने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में अब यदि घंटाघर में कोई अपराध होता है और पुलिस को किशनपुर चौक तक के कैमरे देखने हैं तो गूगल मैपिंग से पता लग जाएगा कि कैमरे कहां-कहां पर लगे हुए हैं।

एसएसपी ने की ये बात
किसी भी आपराधिक घटना का पर्दाफाश करने में सीसीटीवी कैमरों की अहम भूमिका होती है। अब शहर के अंदर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की गूगल मैपिंग की जा रही है। इसमें पुलिस, स्मार्ट सिटी व निजी कैमरे शामिल हैं। एक बार मैपिंग का काम पूरा होने के बाद यदि लगेगा कि और कहीं कैमरे लगाने की जरूरत है तो वहां पर आमजन के सहयोग से कैमरे लगवाए जाएंगे। गूगल मैपिंग का काम पूरा होने के बाद आसानी से पता लग सकेगा कि कहां-कहां कैमरे लगे हुए हैं।- अजय सिंह, एसएसपी, देहरादून

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