देहरादून। जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव के बीच उत्तराखंड में हिमनद झीलों की संख्या और उनका क्षेत्रफल बढ़ा है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान की ओर से वर्ष 2013 से 2025 के बीच किए गए अध्ययन में यह बदलाव सामने आया है। अध्ययन के अनुसार, 12 वर्षों में हिमनद झीलों की संख्या में करीब 1.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इनके कुल क्षेत्रफल में 8.1 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने उत्तराखंड में विभिन्न प्रकार की हिमनद झीलों में वर्ष 2013 से 2025 के बीच हुए बदलाव का अध्ययन किया। इसमें मोरेन डैम लेक, आइस डैम लेक, ग्लेशियर इरोजन लेक और अन्य ग्लेशियर झीलों की संख्या के साथ उनके क्षेत्रफल में हुए बदलाव का भी आकलन किया गया।
1266 से बढ़कर 1290 हुई झीलों की संख्या
अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2013 में उत्तराखंड में कुल हिमनद झीलों की संख्या 1266 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 1290 हो गई। यानी 12 वर्षों में इनकी संख्या में 24 का इजाफा हुआ है। इनमें अन्य मोरेन डैम झीलों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2013 में इनकी संख्या 218 थी, जो 2025 में बढ़कर 287 हो गई।
इसी तरह ग्लेशियर इरोजन लेक की संख्या भी 77 से बढ़कर 164 हो गई है। हालांकि, कुछ श्रेणियों की झीलों की संख्या में कमी भी दर्ज की गई है।
झीलों का क्षेत्रफल 8.1 प्रतिशत बढ़ा
हिमनद झीलों के क्षेत्रफल में भी महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। वर्ष 2013 में इन झीलों का कुल क्षेत्रफल 75,94,871 वर्ग मीटर था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 82,12,630 वर्ग मीटर हो गया। इस तरह 12 वर्षों में क्षेत्रफल में करीब 8.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मनीष मेहता के अनुसार, हिमनद झीलों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई है और यह बढ़ोतरी करीब 1.9 प्रतिशत है। हालांकि, झीलों के क्षेत्रफल में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि महत्वपूर्ण है।
सुप्रा ग्लेशियर झीलों की संख्या घटी
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि राज्य में सुप्रा ग्लेशियर लेक की संख्या में कमी आई है। ग्लेशियर की सतह पर बनने वाली इन झीलों की संख्या वर्ष 2013 में 809 थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 685 रह गई। यानी इस श्रेणी की झीलों में 124 की कमी दर्ज की गई है।
पांच जिलों में 13 झीलें सबसे संवेदनशील
हिमनद झीलों से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने उत्तराखंड में 13 सबसे अधिक संवेदनशील हिमनद झीलों को चिह्नित किया है। ये झीलें चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में स्थित हैं। इन झीलों की निगरानी और संभावित जोखिमों को देखते हुए समय रहते एहतियाती कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है।

