Sunday, March 8, 2026
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पति की शहादत के बाद भी नहीं हारा हौसला, दून की बेटी सेना में बनीं अफसर

देहरादून के चंद्रबनी की रहने वाली है संगीता, शनिवार को ओटीए चेन्नई से हुई पास आउट, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ठीक एक दिन बाद शनिवार को दून की बेटी आफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नई से सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर बतौर लेफ्टिनेंट सेना में अफसर बन गई है।

देहरादून : देहरादून की बेटी संगीता मल्ल पर देश-प्रदेश को नाज है। संगीता उन बेटियों में से एक है जिसने विपरीत परिस्थितियों का डट कर मुकाबला करते हुए अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। पति की शहादत के बाद संगीता ने सेना की जो राह चुनी थी, उसमें वह सफल हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ठीक एक दिन बाद शनिवार को दून की बेटी आफिसर ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नई से सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर बतौर लेफ्टिनेंट सेना में अफसर बन गई है। ओटीए में आयोजित हुई पासिंग आउट परेड में देश-विदेश के 172 जेंटलमैन कैडेट पास आउट हुए। उत्तरी कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग ले. जनरल रणबीर सिंह ने बतौर रिव्यूइंग आफिसर पीओपी में शिरकत कर पासिंग आउट बैच के कैडेटों से सलामी ली।

शहीद की पत्नी व दून की बेटी संगीता मल्ल के साहस की भी उन्होंने सराहना की है। ओटीए से पास आउट होकर सैन्य अफसर बनी संगीता मल्ल देहरादून के चंद्रबनी की रहने वाली हैं। उनके पति शिशिर मल्ल भी सेना के जवान थे और दो सितंबर 2015 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला सेक्टर में आपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हो गये थे। उस दौरान वह राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। गोरखा राइफल के जवान राइफलमैन शहीद शिशिर मल्ल को मरणोपरांत सेना मेडल मिला।

पति की शहादत के बाद संगीता ने हौसला नहीं खोया, बल्कि खुद को बतौर सैन्य अफसर देश सेवा को समर्पित किया। एक सैनिक की बेटी संगीता ने प्रेम विवाह किया। पति शिशिर भी फौजी परिवार से थे। संगीता और शिशिर दोनों एक ही साथ पढ़े थे। राजा राममोहन राय एकेडमी से 12वीं पास करने के बाद शिशिर फौज में भर्ती हो गये। दो सितंबर 2015 एक ऐसी खबर आई जिसने संगीता को भीतर तक झकझोर दिया। बारामूला सेक्टर में आपरेशन रक्षक के दौरान उनके पति राइफलमैन शिशिर शहीद हो गये। अप्रैल 2015 में ही शहीद शिशिर के पिता का भी देहांत हुआ था। ऐसे में पूरा परिवार टूट गया था।

परिवार के समर्थन और उनकी हौसला आफजाई के बाद संगीता ने किसी तरह खुद को संभाला। पिता ने उन्हें सेना में जाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसका सास रेणुका मल्ल ने भी समर्थन किया। इसी दौरान संगीता को रानीखेत में सेना के वीर नारी सम्मान कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। जहां सेना के अधिकारियों व शिशिर के कुछ दोस्तों ने भी संगीता को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद संगीता ने दिल्ली स्थित सेना के वीर नारी सेल से संपर्क किया। वहां सभी ने उनका उत्साह बढ़ाया और आवेदन करने में मदद की गई।

शिक्षिका के तौर पर काम कर चुकी संगीता ने बैंक और सेना, दोनों के लिए परीक्षा दी और दोनों ही जगह पर उनका चयन भी हो गया। पर उन्होंने सेना ही ज्वाइन करने फैसला किया। अप्रैल 2018 में संगीता का चयन ओटीए चेन्नई के लिए हुआ। ओटीए में 11 माह का सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद शहीद जवान की पत्नी और दून की बेटी संगीता शुक्रवार को पास आउट होकर सेना में अधिकारी बन गई है। संगीता की सास, माता-पिता, देवर व ननद भी पासिंग आउट परेड में मौजूद रहे।

परिवार का सेना से है पुराना नाता

शहीद राइफलमैन शिशिर की पत्नी संगीता अपने परिवार से पहली महिला सैन्य अफसर बनी है। हालांकि लेकिन उनके परिवार का सेना से पुराना नाता है। उनके ससुर स्वर्गीय सुरेश मल्ल भी सेना से आनरेरी कैप्टन रैंक से रिटायर हुए थे। संगीता के पिता भगवान सिंह भी सेना के रिटायर ऑनरेरी कैप्टन हैं। वहीं देवर सुशांत मल्ल भी सेना में नायक के रैंक पर तैनात है।

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