Saturday, April 25, 2026
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जानिए किस चीज में गुजरात से आगे है उत्तराखण्ड

देहरादून। संवाददाता। देश में सबसे अच्छा विकास मॉडल समझा जाने वाला गुजरात प्रति व्यक्ति आय के मामले में उत्तराखंड से पीछे है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय एक लाख 60 हजार से अधिक है। जबकि गुजरात की प्रति व्यक्ति आय महज एक लाख 41 हजार के आसपास है। इस मामले में देश के कुछ ही राज्य उत्तराखंड से आगे हैं।

रैबार कार्यक्रम में सूबे की आर्थिक स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए वित्त सचिव अमित नेगी ने बताया कि राज्य गठन के बाद सूबे की प्रति व्यक्ति आय में तेजी से इजाफा हुआ। वर्ष 2000 में प्रति व्यक्ति आय महज 15 हजार थी। जो अब बढ़कर 1,60,795 हो गई है।

नव गठित राज्यों में प्रति व्यक्ति के हिसाब से उत्तराखंड ने ही सबसे अधिक प्रगति की। अलग राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ की प्रति व्यक्ति आय आठ गुना बढ़ी है। झारखंड की प्रति व्यक्ति आय 6 गुना ही बढ़ी। जबकि उत्तराखंड दस गुना से ज्यादा बढ़ाने में कामयाब रहा।

2012 में ही राज्य के 98 प्रतिशत से अधिक गांव बिजली से जोड़े जा चुके हैं। राज्य बनने के दौरान कुल 25 हजार किमी सड़कें थी जो अब बढ़कर 42 हजार किमी से अधिक हो गई हैं।

सामाजिक तरक्की में चैथे स्थान पर राज्य
सामाजिक तरक्की (सोशल प्रोग्रेश इंडेक्श)के मामले में उत्तराखंड देश में चैथे स्थान पर है। इस मामले में केरल पहले, हिमाचल दूसरे, तमिलनाड़ु तीसरे नंबर पर है। देश के अन्य सभी राज्य इस मामले में उत्तराखंड से पीछे हैं। ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्श मामले में राज्य की रैंक सातवीं है। 2007-08 में राज्य की देश में 14 वीं रैंक थी।

बिगड़ रहा लिंगानुपात
सामाजिक तरक्की (सोशल प्रोग्रेश इंडेक्श)के मामले में उत्तराखंड देश में चैथे स्थान पर है। इस मामले में केरल पहले, हिमाचल दूसरे, तमिलनाड़ु तीसरे नंबर पर है। देश के अन्य सभी राज्य इस मामले में उत्तराखंड से पीछे हैं। ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्श मामले में राज्य की रैंक सातवीं है। 2007-08 में राज्य की देश में 14 वीं रैंक थी।

राज्य के सामने बड़ी चुनौतियां
विषम भौगोलिक परिस्थितियों से राज्य के सामने कई चुनौतियां हैं। संसाधनों की कमी और वन भूमि की अधिकता विकास में बाधा बन रही है। मूलभूत सुविधाओं पर ज्यादा लागत, पर्वतीय क्षेत्रों में जरूरी सुविधाएं पहुंचाने में कठिनाई, आपदा की दृष्टि से राज्य की संवेदनशीलता भी विकास में बाधक है। वन संपदा की बहुलता से भी राज्य को आर्थिक लाभ नहीं हो रहा। हार्टिकल्चर, पर्यटन, जल विद्युत परियोजनाओं के क्षेत्र में क्षमता के अनुरूप कार्य न होने से भी राज्य की आर्थिक परेशानी बढ़ रही है।

सबसे अधिक पलायन शिक्षा के लिए
रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सबसे अधिक पलायन शिक्षा के लिए हो रहा है। 31 प्रतिशत लोग शिक्षा के लिए पहाड़ छोड़ रहे हैं। 13 प्रतिशत लोग बेहतर नौकरियों की तलाश में और 29 प्रतिशत शादी के लिए पलायन कर रहे हैं। सरकार की ओर से प्रस्तुत तथ्यों में पलायन करने वाले 35 प्रतिशत लोग राज्य से बाहर जा रहे हैं। जबकि गांवों से कस्बों और शहरों में भी तेजी से पलायन बढ़ रहा है।

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