देहरादून। प्रदेश के अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती अब प्रबंधन तंत्र के माध्यम से नहीं, बल्कि राज्य लोक सेवा आयोग के जरिए कराने की तैयारी है। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक्ट में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
वर्तमान में अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रबंधन तंत्र के माध्यम से होती है। भर्ती के लिए गठित चयन समिति में सरकार, संबंधित विश्वविद्यालय और प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ विषय विशेषज्ञ शामिल होते हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में भर्ती को लेकर समय-समय पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक हरिद्वार के कुछ अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती में अभ्यर्थियों से 50-50 लाख रुपये तक लिए जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सरकार को कई बार इन महाविद्यालयों में नियुक्तियों पर रोक लगानी पड़ी है।
शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में बनी थी समिति
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब भर्ती व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित एक्ट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और कैबिनेट नोट भी तैयार किया जा चुका है।
प्रदेश में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय
अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति का मामला प्रदेश के 21 महाविद्यालयों से जुड़ा है। इनमें कुछ महाविद्यालय एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज, डीबीएस पीजी कॉलेज, एमकेपी पीजी कॉलेज और एसजीआरआर पीजी कॉलेज समेत अन्य संस्थान इसमें शामिल हैं। इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कई महाविद्यालय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं।
राजकीय महाविद्यालयों की तर्ज पर होगी भर्ती
प्रदेश में वर्तमान में 118 राजकीय महाविद्यालय हैं, जहां असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाती है। सरकार अब अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में भी इसी तरह आयोग के माध्यम से भर्ती कराने की तैयारी कर रही है। इससे भर्ती प्रक्रिया को एक समान और अधिक संस्थागत बनाने का प्रयास किया जाएगा।
यूपी में शिक्षा आयोग के माध्यम से होती है भर्ती
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भी पहले अशासकीय इंटर कॉलेजों और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रबंधन तंत्र के माध्यम से होती थी। अब वहां शिक्षा आयोग का गठन किया गया है और इंटर कॉलेजों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती आयोग के माध्यम से की जाती है। उत्तराखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

