देहरादून। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ माताएं रविवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर अहोई माता की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से पूजा करेंगी और तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी।
शाम 5:30 से 6:48 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
आचार्य सुशांत राज के अनुसार, अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। अष्टमी तिथि रविवार दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर सोमवार दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।
शाम के समय अष्टमी तिथि होने के कारण रविवार को ही व्रत रखा जाएगा। वहीं, तारों के उदय का समय शाम 5 बजकर 55 मिनट बताया गया है। तारों के दर्शन के बाद महिलाएं उन्हें जल अर्पित कर संतान की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करेंगी।
अहोई माता की पूजा में इन चीजों का महत्व
पंडितों के अनुसार, व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम को अहोई माता का चित्र स्थापित कर रोली, अक्षत, पुष्प, दीपक और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनकर माता की आरती की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से संतान को सुख, शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

.jpeg)
.jpeg)

