Friday, April 24, 2026
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दून बुक फेस्टिवल में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने युवाओं को किया प्रेरित, बोले—बड़ा सोचो, डर से भागो नहीं

देहरादून। परेड मैदान में आयोजित दून बुक फेस्टिवल के दौरान अंतरिक्ष यात्री एवं फाइटर पायलट शुभांशु शुक्ला ने युवाओं से संवाद कर उन्हें जीवन, विज्ञान और भविष्य को लेकर प्रेरित किया।

कार्यक्रम में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करेगा और 2040 तक मानव को चंद्रमा पर भेजकर सुरक्षित वापस लाने में सक्षम होगा।

उन्होंने बताया कि भारत अपने स्वयं के स्पेस स्टेशन की दिशा में भी लगातार कार्य कर रहा है, जो देश की तकनीकी क्षमता और इसरो के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने युवाओं से कहा कि आज का भारत टेक्नोलॉजी और युवा शक्ति के दम पर वैश्विक पहचान बना रहा है।

युवाओं को प्रेरित करते हुए शुक्ला ने कहा कि जीवन से “मुश्किल” शब्द को हटाकर सपनों के लिए पूरी ताकत से प्रयास करना चाहिए। मजबूत इरादों से असंभव लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे विचार ही हमारे कार्य और जीवन की दिशा तय करते हैं, इसलिए हमेशा सकारात्मक और बड़ा सोचना जरूरी है।

लड़कियों को भी दिया विशेष संदेश
महिला अंतरिक्ष यात्रियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं टीमवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और अंतरिक्ष जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बेहद अहम है। उन्होंने लड़कियों को आगे बढ़कर विज्ञान और अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। डर को लेकर उन्होंने कहा कि डर हर किसी को लगता है, लेकिन उससे भागने के बजाय उसे समझकर आगे बढ़ना चाहिए। भविष्य की चिंता करने के बजाय वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना अधिक प्रभावी होता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल ज्ञान नहीं, बल्कि समस्या समाधान की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण है, जो कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने में मदद करती है। असफलता को उन्होंने सीख का माध्यम बताते हुए कहा कि यह धैर्य और अनुभव प्रदान करती है।

अपने अनुभव साझा करते हुए शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को शून्य गुरुत्वाकर्षण, सीमित संसाधनों और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए कड़े शारीरिक प्रशिक्षण के साथ मानसिक मजबूती और टीमवर्क बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में हर निर्णय सटीक और समयबद्ध होना चाहिए, क्योंकि छोटी सी गलती भी बड़ा खतरा बन सकती है।

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