देहरादून। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद हुए शुद्धिकरण मामले के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास कूच किया। तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। हाथीबड़कला के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
प्रदर्शन में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के शुद्धिकरण को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर है। पार्टी का आरोप है कि मामले में प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में तहरीर दिए जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।
प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि खरगे की रैली के बाद अपने ही लोगों से कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी चुनाव को देखते हुए भाजपा तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है।
कई नेताओं ने थामा कांग्रेस का दामन
मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम के दौरान कुमारी सैलजा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कई लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस में शामिल होने वालों में यशपाल राणा, पूर्व मेयर रुड़की, भुवनेश खर्कवाल, पूर्व प्रमुख यमकेश्वर कोटद्वार, मनोज सैनी, पूर्व प्रधानाचार्य एवं पूर्व अध्यक्ष गन्ना समिति हरिद्वार, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री रामकुमार वालिया, रविंद्र आनंद, पूर्व अध्यक्ष मंडी समिति देहरादून और एडवोकेट सचिन कुमार, पुरोला शामिल रहे।
हरीश रावत ने दिल्ली में रखा एक घंटे का मौन व्रत
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस मुद्दे पर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। दिल्ली स्थित अपने आवास पर उन्होंने एक घंटे का मौन व्रत रखा। स्वास्थ्य लाभ के लिए पिछले कुछ महीनों से दिल्ली में रह रहे रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि उत्तराखंड में अस्पृश्यता और अपमानकारी छुआछूत को संरक्षण देने वाली शक्तियों के खिलाफ संघर्ष जारी है।
उन्होंने कहा कि इसी संघर्ष में अपनी भागीदारी दर्ज कराने के लिए उन्होंने मौन व्रत रखा और प्रार्थना की कि छुआछूत व सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाली शक्तियों की पराजय हो।

