नैनीताल। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई के दौरान रेखा आर्या की ओर से पक्ष रखते हुए कहा गया कि गिरधारी लाल साहू उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें विभिन्न कंपनियों से हटा दिया गया है और उनके करीब 80 प्रतिशत शेयर भी बेच दिए गए हैं। इससे उनके राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इस आधार पर याचिका निरस्त करने की मांग की गई।
वहीं, गिरधारी लाल साहू की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा गलत तथ्यों पर आधारित है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। उनकी ओर से कहा गया कि रेखा आर्या को कभी डराया या धमकाया नहीं गया। कंपनियों में उनके शेयर आज भी मौजूद हैं और जिन कंपनियों से उन्हें हटाया गया, वहां से सहमति के आधार पर हटाया गया है। किसी तरह के फर्जी हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। साथ ही कहा गया कि रेखा आर्या के राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने में उन्होंने पूरा सहयोग किया है।
दरअसल, बरेली निवासी गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में उन्होंने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में रेखा आर्या से शादी हुई थी और तब से वे साथ रह रहे हैं।
मामले में आरोप लगाया गया है कि गिरधारी लाल साहू ने खुद को अविवाहित बताकर रेखा आर्या से शादी की, जबकि वह पहले से शादीशुदा थे। इसके अलावा जालसाजी कर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए उन्हें कई कंपनियों के निदेशक पद से हटाने, जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
वहीं, गिरधारी लाल साहू ने अपनी याचिका में दावा किया है कि रेखा आर्या के मंत्री बनने के बाद करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है कि शादी के करीब 22 वर्षों में उनके बीच कभी मनमुटाव नहीं हुआ और अब गलत तथ्यों के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

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