Saturday, March 7, 2026
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विज्ञान महोत्सव में बच्चों की नवाचारी सोच, जल बचत के दिए अनोखे समाधान

हल्द्वानी। नई पीढ़ी जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कितनी गंभीर है, इसका शानदार उदाहरण राज्य स्तरीय विज्ञान महोत्सव में देखने को मिला। प्रदेशभर से पहुंचे बाल वैज्ञानिकों ने अपनी रचनात्मक सोच और तकनीकी समझ का परिचय देते हुए ऐसे मॉडल प्रस्तुत किए, जो जल संरक्षण, आधुनिक कृषि तकनीक और ऊर्जा बचत की दिशा में बड़े समाधान साबित हो सकते हैं।

महोत्सव में बच्चों ने हवा और पानी बचाने के लिए छोटे-छोटे घरेलू उपायों से लेकर उन्नत तकनीक के उपयोग तक कई सुझाव दिए। जल संरक्षण पर आधारित उनके मॉडल पानी की बर्बादी को रोकने और बेहतर प्रबंधन की दिशा में नई उम्मीद जगाते हैं।

स्मार्टफोन से नियंत्रित होगी खेतों की सिंचाई
जीजीआईसी राजपुर रोड, देहरादून की छात्रा समीरा जयाड़ा ने ब्लूटूथ कंट्रोल वाटर सिस्टम मॉडल बनाकर कृषि में स्मार्टफोन के उपयोग का अनोखा उदाहरण पेश किया। उनके मॉडल में खेत में लगाए गए सेंसर मोबाइल एप के जरिए मिट्टी की नमी का स्तर बताते हैं। नमी कम होने पर किसान मोबाइल से ही सिंचाई चालू और बंद कर सकते हैं। इससे समय पर सिंचाई होने के साथ पानी की बर्बादी भी रोकने में मदद मिलेगी।

सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई तकनीक से पानी होगा पुनर्चक्रित
पब्लिक इंटर कॉलेज सुरखेत की नवीं की छात्रा कनिष्का कैंथोला ने सतत कृषि पर आधारित सौर ऊर्जा से चलने वाला सिंचाई सिस्टम बनाया है। इसमें भूमिगत टैंक में एकत्र पानी को सौर ऊर्जा की मदद से ऊंचाई वाले टैंक तक पहुंचाया जाता है, जहां से ड्रिप तकनीक से खेतों में पानी छोड़ा जाता है। बचा हुआ पानी वापस भूमिगत टैंक में एकत्र हो जाता है। इससे पानी की बर्बादी पूरी तरह रोकी जा सकती है और किसान बिजली के खर्च से भी बच सकते हैं।

कोहरे की नमी से निकलेगा पानी, उपयोग में आएगा रोजमर्रा में
कैंट बोर्ड हाईस्कूल लैंसडौन के नवीं के छात्र अंश ने कोहरे की नमी से पानी निकालने का अभिनव मॉडल प्रस्तुत किया। एक बड़े एग्जास्ट सिस्टम से जुड़े फिल्टर के माध्यम से कोहरे को खींचकर उसमें मौजूद नमी को पानी में परिवर्तित किया जा सकता है। यह पानी पीने, सिंचाई और अन्य घरेलू कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।

आधुनिक अलार्मिंग तकनीक से घरों में बचेगा पानी
एयू जीआईसी रुड़की के आठवीं के छात्र ऋषभ और जीआईसी चाफी की सातवीं की छात्रा यामिनी तिवारी ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए आधुनिक अलार्मिंग तकनीक आधारित मॉडल बनाए हैं। टंकी में सेंसर लगाकर पानी ओवरफ्लो होने पर अलार्म बजाया जा सकता है। ओवरफ्लो हुआ पानी वाहन धोने में उपयोग किया जा सकता है और वाहन धोने के बाद बहने वाला पानी छोटे प्लांट से फिल्टर कर खेती में उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह टॉयलेट के पानी को भी फिल्टर कर पुन: उपयोग में लाया जा सकता है।

राज्य स्तरीय विज्ञान महोत्सव में बच्चों के ये नवाचारी मॉडल यह साफ बताते हैं कि नई पीढ़ी न केवल जागरूक है बल्कि तकनीक का उपयोग कर पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए मजबूत समाधान देने की क्षमता भी रखती है।

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