डीडीहाट। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा देने और युवाओं को उद्यमिता के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से विकासखंड डीडीहाट की दूरस्थ ग्रामसभा खेतार कन्याल में दो दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 22 और 23 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों को स्वरोजगार के अवसरों तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई।
उद्योग निदेशालय, उत्तराखंड शासन के तत्वावधान में जिला उद्योग केंद्र पिथौरागढ़ के प्रायोजन और उपलब्धि सामाजिक एवं स्वैच्छिक समिति के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित करना रहा।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उचित जानकारी, योजनाबद्ध प्रयास और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने युवाओं और महिलाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वयं का उद्यम स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की दी जानकारी
प्रशिक्षण सत्र में जिला उद्योग केंद्र पिथौरागढ़ की सहायक प्रबंधक रिचा पांडेय ने उद्यमिता विकास और स्वरोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की उद्यमिता प्रोत्साहन योजनाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप इंडिया पहल, बैंक ऋण, अनुदान, सब्सिडी, प्रशिक्षण सुविधाओं और आवेदन प्रक्रिया के बारे में ग्रामीणों का मार्गदर्शन किया।
इस दौरान ग्रामीणों को स्थानीय संसाधनों के आधार पर छोटे उद्यम स्थापित करने और सरकारी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता प्राप्त करने के विभिन्न विकल्पों से भी अवगत कराया गया।
गांवों में रोजगार सृजन से रुकेगा पलायन
समिति के सचिव अरविंद सिंह ज्याला ने कहा कि पलायन की चुनौती का स्थायी समाधान गांवों में ही रोजगार और उद्यम सृजन की संभावनाओं को विकसित करने में निहित है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय युवाओं को उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और उद्यम स्थापना के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपने कौशल और स्थानीय संसाधनों के आधार पर गांव में ही आजीविका के साधन विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा मिलने से युवाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। इसके साथ ही स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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