वाहन पंजीकरण और फिटनेस जांच की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नियमों के तहत वाहनों की तकनीकी जांच पर जोर दिया जा रहा है। अब वाहन की फिटनेस जांच में केवल कागजात ही नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक स्थिति और बॉडी की हालत का निरीक्षण भी महत्वपूर्ण होगा। ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (ATS) में आधुनिक उपकरणों की मदद से वाहनों की जांच की जाती है।
टेस्टिंग लेन में होगी वाहन की जांच
ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर में वाहनों की फिटनेस जांच के दौरान ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, हेडलाइट, प्रदूषण स्तर और अन्य जरूरी तकनीकी मानकों की जांच की जा सकती है। इसके साथ ही वाहन की बॉडी का दृश्य निरीक्षण भी किया जाता है, जिससे क्षतिग्रस्त या असुरक्षित हिस्सों की पहचान करने में मदद मिलती है।
सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
वाहनों की तकनीकी जांच को मजबूत बनाने का उद्देश्य सड़कों पर असुरक्षित वाहनों की आवाजाही कम करना और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है। हालांकि, नए नियमों का सटीक दायरा और लागू होने की तारीख संबंधित राज्य के परिवहन विभाग के आदेश से ही स्पष्ट होगी।

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