Sunday, March 8, 2026
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पाकिस्तान के मददगार बन रहे विपक्षी नेता, कुर्सी के भूखे मांग रहे हैं सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत-नरेन्द्र सहगल

वोट के लोभी शहीदों की शहादत पर जितनी सियासत करेंगे, उतना ही ये भारतवासियों की नजरों में गिरते चले जायेंगे । अपने राजनीतिक अस्तित्व पर स्वयं कुल्हाड़ी मार रहे इन स्वार्थी नेताओं को इतना भी पता नहीं चल रहा कि इनके बयानों से पाकिस्तान में घी के दिए जलाये जा रहे हैं

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि वह पाताल में जाकर भी आतंकवादियों को खोज खोज कर मारेंगे। वायुसेना के चीफ मार्शल बी. एस. धनोआ ने भी कह दिया है कि आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए शुरू हुई जंग चलती रहेगी। 26 फरवरी को भारतीय वायुवीरों ने पाकिस्तान में घुस कर पाक प्रायोजित आतंकवाद के सबसे बड़े अड्डे को तबाह करके लगभग 300 दहशतगर्दों को जहन्नुम में पहुंचा दिया था । सारा देश इन रणबांकुरों के शौर्य के आगे नतमस्तक है ।

देश विदेश में भारतीय सेना की इस ऐतिहासिक विजय को सराहा जा रहा है । परन्तु भारत में सक्रिय मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (आई) सहित महामिलावटी गठबंधन से सम्बंधित अधिकांश राजनीतिक दलों ने भारतीय सेना के शौर्य पर सियासत की रोटियां सेंकनी प्रारभ कर दी है । शर्म की सारी हदें पार करके कुर्सी के भूखे इन दलों के नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगकर जहाँ एक ओर पाकिस्तान की मदद की है वहीं दूसरी ओर इन्होने भारत की सैनिक रणनीति को चौराहे पर लाकर भारतीय जवानों का मनोबल तोड़ने का अति घ्रणित प्रयास भी किया है। ये अलग बात है कि इस तरह के अराष्ट्रीय तत्वों के बेशर्म बयानों से भारत के वीरव्रती सैनिको का मनोबल टूटने वाला नहीं है।

वोट के लोभी शहीदों की शहादत पर जितनी सियासत करेंगे, उतना ही ये भारतवासियों की नजरों में गिरते चले जायेंगे । अपने राजनीतिक अस्तित्व पर स्वयं कुल्हाड़ी मार रहे इन स्वार्थी नेताओं को इतना भी पता नहीं चल रहा कि इनके बयानों से पाकिस्तान में घी के दिए जलाये जा रहे हैं सर्वश्री राहुल गाँधी, कपिल सिब्बल, नवजोत सिंह सिद्धू, पी, चिदम्बरम, रणदीप सुरजेवाला, दिग्विजय सिंह, मनीष तिवारी और उधर ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव और केजरीवाल इत्यादि ऐसे नेता है जो अपने सियासी वजूद को बचाने के लिए भारत के यशस्वी एवं विजयी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता से उखाड़ने के नशे में देश की सुरक्षा और स्वाभिमान को भी खतरे में डालने से बाज नहीं आ रहे ।

“वायुसेना ने आतंकी मारे हैं या पेड़ गिराए हैं ? 300 सीट प्राप्त करने के लिए और कितने फौजी मरवाएगा नरेंद्र मोदी ? सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत दो ? प्रधानमंत्री देश को सच बताएं कि स्ट्राइक हुई है या नहीं? हुई है, तो कितने आतंकी मरे हैं? हवाई हमले, की दुनिया को सबूतों सहित जानकारी दी जाये ? पुलवामा आतंकी हमले को दुर्घटना बताने वाले यह भी पूछ रहे हैं कि 300 किलो आईईडी के साथ आतंकी पुलवामा कैसे पहुँच गये ?”

इस तरह के घटिया और उलटे-सीधे सवाल पूछकार अपना सियासी उल्लू सीधा करने में एकजुट हुए राजनीतिक दलों को शहीदों के बच्चों का चीत्कार भी सुनाई नहीं दे रहा । शहीदों की लाशों और उनकी विधवाओं के आसुओं पर राजनीतिक व्यापार करने वाले इन पेशावर नेताओं ने पुलवामा में हुए वीभत्स आतंकी हमले पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं ।

भाजपा सरकार और भारतीय सेना पर अविश्वास करने वाले ये ज़मीर से गिरे हुए वही लोग हैं जिनका देश की सफल विदेश नीति, सीमाओं की पुख्ता सुरक्षा, तरक्की की राह पर आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था और विकास की बुलंदियां छू रही नीतियों से कुछ भी लेना देना नही है । ये वही लोग हैं जो भारत विभाजन के जिम्मेदार है, जिन्होंने कश्मीर समस्या के बीज बोये हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के साथ ताशकंद तथा शिमला जैसे समझौते करके हमारे विजयी जवानों की बहादुरी के साथ दगा किया है । देश के भीतर जातिवाद, फिरकापरस्ती और परिवारवाद का जहर घोलने वाले इन लोगों की आज पाकिस्तान की संसद में तारीफ़ हो रही है

हैरानी की बात है आज पाकिस्तान में एक भी राजनीतिक नेता, बुद्धिजीवी और पत्रकार नहीं मिलेगा जो इस अवसर पर वहां की सरकार और सेना की आलोचना कर रहा हो । परन्तु भारत में मोदी विरोधी दल और नेता पाकिस्तान की भाषा बोलकर वहां के मीडिया, संसद और सरकार को सामग्री की सप्लाई कर रहे है । शर्म के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले गये हैं.

नरेन्द्र सहगल

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक 

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