बाजपुर में जनजातीय समुदाय की भूमि से जुड़े मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रकरण में अरविंद पांडेय के बेटे अतुल पांडेय को तहसील प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया है, जबकि तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो राकेश शाह को उत्तरकाशी संबद्ध कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, मंडलायुक्त के आदेश को पहले राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। इस मामले पर फिलहाल कोई भी अधिकारी खुलकर बयान देने से बच रहा है।
तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान द्वारा जारी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कूट रचित साक्ष्यों के आधार पर जनजाति बुक्सा समुदाय की भूमि अतुल पांडेय के नाम दर्ज कराई गई। शिकायत ग्राम सैमलपुरी निवासी नन्नी देवी, संजू कुमार और मंगल सिंह की ओर से की गई है। उनका कहना है कि न्यायालय से जीत के बावजूद वे अपनी भूमि पर कब्जा नहीं पा सके हैं।
नोटिस में यह भी उल्लेख है कि अतुल पांडेय द्वारा अपने पक्ष में प्रस्तुत दस्तावेजों में आयु संबंधी विसंगतियां हैं। वर्ष 2010 में दायर प्रार्थना पत्र के अनुसार उनकी उम्र 16 वर्ष बताई गई थी, जबकि वर्तमान में उनकी उम्र 32 वर्ष है। साथ ही, विवादित भूमि पर 50 वर्षों से अधिक समय से कब्जे का दावा भी संदेह के घेरे में है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि झूठे शपथ पत्र और फर्जी साक्ष्यों के आधार पर अनुसूचित जनजाति की भूमि को अवैध तरीके से अपने नाम कर हड़पा गया और बाद में उसे बेचकर लगभग 28 लाख रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया गया।
मामले में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं सामने आने पर प्रशासन ने अतुल पांडेय को एक सप्ताह के भीतर उपस्थित होकर पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। अनुपस्थित रहने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

