सल्ट। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) से सटे डभरा सौराल में बाघ के हमले में 21 वर्षीय नवविवाहिता शालू देवी की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और छह माह के भीतर चार ग्रामीणों की मौत से गुस्साए विभिन्न संगठनों और ग्रामीणों ने बुधवार को मोहान तिराहा पर प्रदर्शन किया और एनएच पर सांकेतिक धरना दिया।
प्रदर्शन से पहले ग्रामीणों ने बाघ के हमले में जान गंवाने वाली शालू देवी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सरकार और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर अपना आक्रोश जताया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर पहुंच चुका है। लगातार हो रहे बाघों के हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग अपनी जान की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
मुआवजे से नहीं होगा समस्या का समाधान
वक्ताओं ने कहा कि वन्यजीवों के हमले में मौत या घायल होने पर मिलने वाला मुआवजा पीड़ित परिवार के लिए महज एक छोटी सहायता है। ग्रामीणों की जिंदगी बचाने के लिए राज्य से लेकर केंद्र स्तर तक ठोस और दीर्घकालीन नीति बनाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान करना होगा।
उन्होंने वन विभाग के अधिकृत और प्रशिक्षित कर्मचारियों को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके। साथ ही हमलों की रोकथाम में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई गई।
गांवों से पलायन रोकने पर जोर
प्रदर्शनकारियों ने पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि पहाड़ों में लोगों को रोजगार और सुरक्षा का भरोसा मिलेगा तो गांवों को आबाद रखने में मदद मिलेगी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर से जल्द ही ग्रामीणों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो वे वृहद आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
धरने में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत, धनगढ़ी पुल संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनील टम्टा, घनानंद शर्मा, बिशन दत्त शर्मा, देव सिंह, देवेंद्र सिंह, आनंद राम, मुनीश कुमार, प्रेम राम, ललित उप्रेती, चंद्र सिंह रावत समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।

