अल्मोड़ा। कार्बेट और कालागढ़ टाइगर रिजर्व से सटे तड़म गांव में ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बने बाघ को आखिरकार वन विभाग की टीम ने काबू में कर लिया। विशेषज्ञ शूटर दल की पूर्व नियोजित रणनीति और लगातार निगरानी के बाद बाघ को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया।
वन विभाग के अनुसार पिछले एक माह में तड़म गांव में हुई दो घटनाओं में यही वयस्क नर बाघ शामिल था। बाघ की गतिविधियों और व्यवहार का गहन अध्ययन करने के बाद विशेषज्ञ टीम ने उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया। देर रात सफल कार्रवाई करते हुए बाघ को बेहोश कर रामनगर स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
इस कार्रवाई के साथ ही यह संशय भी खत्म हो गया कि घटनाओं के पीछे बाघ था या गुलदार। विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि हमलों में यही नर बाघ शामिल था।
डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि बाघ के पकड़े जाने से तड़म गांव के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर रोक लगेगी और ग्रामीण सुरक्षित महसूस करेंगे।

