देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अगले दो वर्षों में बुनकरों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। सरकार की योजना कम से कम 25 हजार बुनकरों को स्वरोजगार से जोड़ने की है। इसके लिए विशेष प्रोत्साहन योजना, स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीएसपी) और ट्राइबल सब प्लान (टीएसपी) के संचालन में तेजी लाई जाएगी।
अगस्त 2026 तक की हैंडलूम जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों से 12,561 बुनकर जुड़े हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भरत सिंह चौधरी ने बुनकरों की संख्या बढ़ाने की योजना की पुष्टि की है।
पांच जिलों में प्रमुख रूप से होता है हथकरघा का काम
प्रदेश में पिथौरागढ़ जिले के धारचूला और मुनस्यारी, उत्तरकाशी के डुंडा और भटवाड़ी, ऊधमसिंह नगर के जसपुर, हरिद्वार के रुड़की तथा चमोली के माणा-घिघराण क्षेत्र में हथकरघा गतिविधियां संचालित होती हैं।
वहीं, हस्तशिल्प से जुड़ी गतिविधियां प्रदेश के सभी 13 जिलों में चल रही हैं। इन क्षेत्रों में तैयार उत्पादों की बिक्री हिमाद्री इम्पोरियम के माध्यम से देहरादून, उत्तरकाशी और नई दिल्ली में की जाती है। इसके अलावा उत्पादों की ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री भी की जा रही है।
तीन वित्तीय वर्षों में 1.57 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की कुल बिक्री 1.57 करोड़ रुपये से अधिक रही।
वर्ष 2023-24 में उत्पादों की बिक्री 81.21 लाख रुपये दर्ज की गई। हालांकि, इसके बाद के दोनों वित्तीय वर्षों में बिक्री का आंकड़ा 40 लाख रुपये से नीचे रहा। ऐसे में सरकार के सामने बुनकरों की संख्या बढ़ाने के साथ उत्पादों की बिक्री को गति देने की चुनौती भी है।
अनुभवी बुनकर युवाओं को देंगे प्रशिक्षण
हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए सरकार अनुभवी बुनकरों को प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त करने की योजना बना रही है। विभाग जल्द ही इस दिशा में काम शुरू करेगा।
इसके साथ ही स्कूलों में भी हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि युवाओं को पारंपरिक कला और कौशल से जोड़ा जा सके। सरकार का लक्ष्य प्रशिक्षण, प्रोत्साहन योजनाओं और उत्पादों की बिक्री के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करना है।
भरत सिंह चौधरी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री, के अनुसार, आने वाले समय में प्रदेश में बुनकरों की संख्या बढ़ाने और हथकरघा एवं हस्तशिल्प गतिविधियों को गति देने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

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