देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र ने सात अगस्त को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज से अत्यंत तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना जताई गई है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया।
132 सड़कें बंद, चार एनएच भी प्रभावित
बारिश, भूस्खलन और भूधंसाव के कारण प्रदेश में 132 सड़कें बंद हैं। इनमें चार राष्ट्रीय राजमार्ग, चार स्टेट हाईवे, एक मुख्य जिला मार्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। अल्मोड़ा में पांच, बागेश्वर में 11, चमोली में 24, देहरादून में 10, नैनीताल में नौ, पौड़ी में 17, पिथौरागढ़ में 18, रुद्रप्रयाग में सात, टिहरी में 16 और उत्तरकाशी में 15 मार्ग बंद हैं। पिथौरागढ़ में बीआरओ के सोबला-तिदांग और तवाघाट-गुंजी एनएच भी प्रभावित हैं। लोनिवि की ओर से बंद मार्गों को खोलने का काम जारी है।
गंगा चेतावनी निशान से ऊपर
लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हरिद्वार में गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान 293 मीटर को पार कर 293.30 मीटर पहुंच गया। खानपुर में भी गंगा चेतावनी रेखा से ऊपर बह रही है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। इस मानसून सीजन में पहली बार गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा के पार पहुंचा है। अब तक अधिकतम 1.67 लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया है।
ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 339.90 मीटर पहुंच गया, जो चेतावनी रेखा से 25 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन का आरती स्थल पूरी तरह जलमग्न हो गया। ढालवाला और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में भी दुकानदारों ने एहतियातन दुकानें बंद कर दी हैं। गंगा किनारे स्थित सरकारी और निजी स्कूलों को भी बंद किया गया है। प्रशासन लाउडस्पीकर से लोगों को गहरे पानी में स्नान और सेल्फी लेने से बचने की अपील कर रहा है।
अलकनंदा, मंदाकिनी समेत कई नदियां चेतावनी स्तर के करीब
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। चमोली में अलकनंदा, नंदाकिनी और पिंडर नदियां चेतावनी स्तर के करीब हैं। पिथौरागढ़ में काली नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है, जबकि गोरी और सरयू नदियां भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं।
मुख्य सचिव ने 24 घंटे निगरानी के दिए निर्देश
प्रदेश में बारिश से बने हालात की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के लोगों को पहले से सूचना देकर सतर्क किया जाए। जरूरत पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट भेजा जाए।
मुख्य सचिव ने सभी मौसम चेतावनियों को जिला, ब्लॉक, तहसील और ग्राम स्तर तक समय पर पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही जिलाधिकारियों को नियमित फील्ड निरीक्षण करने और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति का स्वयं जायजा लेने को कहा।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि चारधाम यात्रा आस्था के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, आवागमन, चिकित्सा, पेयजल, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। अत्यधिक बारिश या मार्ग बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और हालात सामान्य होने पर ही आगे भेजा जाए।
संचार व्यवस्था बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सभी सैटेलाइट फोन को क्रियाशील रखने और उनके माध्यम से राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के बीच नियमित संपर्क सुनिश्चित करने को कहा गया है।
गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे बार-बार बंद
उत्तरकाशी में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित है। गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा और पत्थर गिरने से यातायात बार-बार बाधित हो रहा है। कई स्थानों पर यात्रियों और कांवड़ियों को जोखिम उठाकर हाईवे पार करना पड़ा। जिले में 13 सड़कें अभी भी बाधित बताई गई हैं।

