देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान सीएमआई गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा शायरा की ओर से कही गई बात को लेकर उठे विवाद के बाद छात्रा और स्कूल की ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल रबेका सिंह ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। शायरा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से जो बात कहना चाहती थी, उसे ठीक से नहीं कह पाई। वह संवाद के दौरान घबरा गई थी और अपनी बात स्पष्ट तरीके से नहीं रख सकी।
शायरा ने इंटरनेशनल क्वान की डो प्रतियोगिता में चयन को लेकर अपनी बात रखी थी। वहीं, ऑफिसिएटिंग प्रिंसिपल रबेका सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी लेने पर पता चला कि शायरा विभिन्न प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। हालांकि, संबंधित प्रतियोगिता में उसने स्कूल की ओर से प्रतिभाग नहीं किया था और न ही स्कूल स्तर पर इस तरह की कोई प्रतियोगिता आयोजित हुई थी।
प्रिंसिपल ने बताया कि शायरा एक निजी एसोसिएशन के माध्यम से प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही थी, जहां उसे कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शायरा प्रतिभावान छात्रा है और उसकी प्रतिभा को देखते हुए स्कूल स्तर से उसे हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
छात्रों के सुझाव सरकारी नीतियों में होंगे शामिल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के साथ संवाद में मिले सुझावों को सरकारी नीतियों में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सीएम आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों से नशामुक्त उत्तराखंड, स्वच्छता, परिवहन व्यवस्था और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने विद्यालयी छात्र-छात्राओं के लिए ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड : एक विकसित राज्य के लिए मेरा दृष्टिकोण’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। चयनित छात्रों के नीट, जेईई और क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग समेत अन्य आवश्यक शुल्क का वहन राज्य सरकार करेगी।
कार्यक्रम में प्रदेशभर के 2828 सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों के कक्षा 11वीं और 12वीं के तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। संवाद के दौरान छात्रों ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में अवसर बढ़ाने, उच्च शिक्षा में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने समेत कई सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके आधार पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।
‘संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए’
मुख्यमंत्री ने छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जीवन में संकल्प लेकर आगे बढ़ने से कामयाबी निश्चित होती है। उन्होंने कहा कि संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। बिना विकल्प के संकल्प लेने पर सफलता की ओर तेजी से बढ़ा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
जरूरत के अनुसार ही एआई का करें इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने छात्रों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को लेकर भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि एआई उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है। किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके बाद गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीख लेते हुए जरूरत पड़ने पर एआई की सहायता लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकनीक को सहयोगी बनाएं, लेकिन इसे हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं बनने देना चाहिए। आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

