उत्तराखंड के लोकल वन प्रोडेक्ट्स को मिलेगी पहचान,जानिए कैसे मिलेगा लाभ

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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के तहत वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट प्रोजेक्ट से प्रदेश के उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। योजना के तहत प्रत्येक जिले में इकाइयां खोलने के साथ आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे प्रदेश के हजारों लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।  केंद्र सरकार पीएमएफएमई योजना के तहत पांच साल में 1591 इकाइयां खोलने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में प्रदेश भर में 130 इकाइयों को खोली जा रही हैं। यूएसनगर में सबसे अधिक 22 तो चम्पावत, बागेश्वर व रुद्रप्रयाग में सबसे कम पांच-पांच इकाइयां खोली जाएंगी। प्रत्येक जिले के लिए एक उत्पाद का चयन किया गया है, जिनमें मशरूम, सेब, बेकरी, फलों का जूस, मसाले, नींबू वर्गीय फल, हल्दी, आम, खुमानी, कीवी, मत्स्य, चौलाई, अदरक आदि उत्पाद शामिल हैं। उत्पादों का चयन संबंधित जिलों में उत्पादन के आधार पर किया गया है। योजना के तहत प्रत्येक व्यक्ति को सूक्ष्म उद्योग शुरू करने के लिए 28 लाख से दो करोड़ रुपये तक का ऋण दिया जाएगा।

ऐसे मिलेगा लाभ:प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन और उद्यान विभाग में होंगे। डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी काश्तकार व उद्यमी का चयन साक्षात्कार के बाद करेगी। आवेदक के लिए डीपीआर प्रस्तुत करने की बाध्यता से छूट दी गई है। इसके अलावा काश्तकार को बीज, बुनियादी ढांचा, भवन, मार्केटिंग के साथ प्रशिक्षण की सुविधा सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी।

यहां खुलेंगी इन उत्पादों की इकाइयां
जिला                 स्वीकृत उत्पाद   इकाइयां

हरिद्वार               बेकरी                14
हरिद्वार               मशरूम             10
टिहरी                अदरक               09
उत्तरकाशी          सेब                   10
पौड़ी                  सिस्ट्रस              09
चमोली               मत्स्य                 05
रुद्रप्रयाग            चौलाई               05
नैनीताल             रस, स्वकैश        18
अल्मोड़ा             खुबानी              09
पिथौरागढ़           हल्दी                09
बागेश्वर               कीवी                05
चम्पावत             तेज पत्ता, मसाले  05
यूएसनगर           आम                  22

पीएमएफएमई के तहत वन डिस्ट्रिक व प्रोडक्ट योजना शुरू कर दी गई है। पहले चरण में इकाइयों को खोलने के साथ इच्छुक काश्तकारों के आवेदन मंगाए जा रहे हैं। योजना से स्थानीय उत्पादों को पहचान के साथ काश्तकारों को फसल का लाभ व हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
मीनाक्षी जोशी, जिला उद्यान अधिकारी देहरादून   

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