देहरादून। उत्तराखंड के हिमाच्छादित और दुर्गम क्षेत्रों में जनगणना कार्य के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एक सितंबर से चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के 131 हिमाच्छादित गांवों में घर-घर जाकर जनगणना शुरू होगी। इसके साथ ही बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री नगर पंचायत क्षेत्रों को भी अभियान में शामिल किया गया है।
जनगणना निदेशालय के अनुसार विशेष अभियान के तहत चमोली के 23, पिथौरागढ़ के चार, रुद्रप्रयाग के 69 और उत्तरकाशी के 35 हिमाच्छादित गांवों में जनगणना की जाएगी। अभियान के लिए 139 प्रगणक और 43 पर्यवेक्षकों समेत कुल 182 कार्मिकों को प्रशिक्षित किया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष तैयारी
जनगणना कार्य के लिए चमोली में 28 प्रगणक और 10 पर्यवेक्षक, पिथौरागढ़ में 18 प्रगणक और चार पर्यवेक्षक, रुद्रप्रयाग में छह प्रगणक और छह पर्यवेक्षक तथा उत्तरकाशी में 87 प्रगणक और 23 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।
प्रशिक्षण के दौरान कार्मिकों को जनगणना की अवधारणा और प्रक्रिया, डिजिटल माध्यम से आंकड़े जुटाने, निर्धारित गणना क्षेत्रों की पहचान तथा सूचनाओं की शुद्धता और गोपनीयता सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित अवधि को देखते हुए जिला प्रशासन व स्थानीय निकायों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है।
338 नागरिकों ने कराया स्व-गणना पंजीकरण
जनगणना प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। 31 अगस्त तक 338 नागरिकों ने स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है। इनमें उत्तरकाशी के 277, पिथौरागढ़ के 24, चमोली के 29 और रुद्रप्रयाग के आठ नागरिक शामिल हैं।
जनगणना निदेशालय ने लोगों से प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को आवश्यक सहयोग देने की अपील की है। जनगणना से संबंधित जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन 1855 पर संपर्क किया जा सकता है।
ओटीपी साझा न करने की अपील
निदेशालय ने लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए भी सतर्क किया है। नागरिकों को बताया गया है कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी या संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा न करें।

