Monday, August 31, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीय समाचारनेपाल में बाढ़ से 903 लोगों की मौत, चितवन में 250 शवों...

नेपाल में बाढ़ से 903 लोगों की मौत, चितवन में 250 शवों की पहचान का इंतजार

काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है। बाढ़ में बहकर बड़ी संख्या में शव देश के निचले इलाकों तक पहुंच गए हैं। दक्षिण-मध्य नेपाल के चितवन जिले में करीब 250 शवों की पहचान का इंतजार किया जा रहा है। शवों को सुरक्षित रखने की सीमित क्षमता और फॉरेंसिक सुविधाओं की कमी के चलते प्रशासन ने उन्हें अस्थायी रूप से दफनाना शुरू कर दिया है।

अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को करीब 100 शवों को अस्थायी कब्रों में दफनाया गया। इससे पहले शवों के डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं। साथ ही चेहरे की पहचान से जुड़े विशेष निशानों की तस्वीरें और अन्य पहचान संबंधी जानकारी दर्ज की जा रही है। प्रत्येक शव को एक संदर्भ संख्या दी जा रही है, ताकि भविष्य में परिजन पहचान होने पर शव को वापस लेकर उचित अंतिम संस्कार कर सकें।

पुलिस निरीक्षक अनिल थापा ने बताया कि कई शव करीब चार दिनों तक बाढ़ के पानी में डूबे रहे, जिसके कारण उनमें सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। तेज गर्मी और नमी के चलते शवों के तेजी से खराब होने का खतरा बढ़ गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी शवों को लंबे समय तक खुले में रखने से बीमारी फैलने की आशंका जताई है।

अंतिम संस्कार की परंपरा को लेकर उठे सवाल

प्रशासन के अस्थायी दफन के फैसले को लेकर नेपाल में नाराजगी भी सामने आ रही है। कुछ स्थानीय लोगों और लापता लोगों के परिजनों ने सवाल उठाया है कि परिवारों की सहमति के बिना शवों को दफनाना उचित नहीं है। नेपाल में हिंदू आबादी बड़ी संख्या में है और यहां पारंपरिक रूप से मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है।

दो रिश्तेदारों की तलाश कर रहीं रूबी चौधरी ने कहा कि मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए और परिवार के करीबी सदस्यों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की परंपरा का पालन होना चाहिए।

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने भी अज्ञात शवों को दफनाने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खोज एवं बचाव अभियान पूरा होने और लापता लोगों के परिवारों से व्यापक विचार-विमर्श से पहले ऐसा कदम उठाना उचित नहीं था। उन्होंने शवों को रखने के लिए अस्थायी मुर्दाघर या सुरक्षित शीत भंडारण की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह स्थायी दफन नहीं बल्कि अस्थायी व्यवस्था है। शवों से डीएनए और पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित रखी जा रही है। बाद में किसी शव की पहचान होने पर परिजन उसे वापस लेकर अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकेंगे।

इस बीच रविवार को नए भूस्खलन के कारण काठमांडू-चितवन मुख्य राजमार्ग भी बंद हो गया। इससे राहत सामग्री और शवों के परिवहन का काम और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
video
play-sharp-fill

Most Popular

Recent Comments